मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र के ओएसडी दीपक डिमरी का निधन, जाते-जाते कई लोगों को दे गए जिंदगी
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मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) दीपक डिमरी (41) का बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे मिलन विहार जीएमएस रोड स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह मार्च 2016 से लीवर कैंसर से पीड़ित थे।
उनके पार्थिव शरीर को उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद्र अग्रवाल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट सहित कई गणमान्य लोगों ने उनके आवास पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनका अंतिम संस्कार नहीं हुआ बल्कि उनकी इच्छा के अनुरूप मेडिकल कालेजों को नेत्र और देहदान कर दिया गया।
मूल रूप से ग्राम स्वीली सेम जनपद रुद्रप्रयाग निवासी दीपक डिमरी पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूड़ी और डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक के कार्यकाल में भी उनके ओएसडी रहे। जल संस्थान से सेवानिवृत्त राम लाल डिमरी के दो बेटों में वह सबसे बडे़ थे।
दीपक अपने पीछे पत्नी रजनी डिमरी, छह वर्षीय पुत्र अक्षत, आठ वर्षीय पुत्री मैत्रयी, मां कमला डिमरी, पिता राम लाल डिमरी और अपने छोटे भाई प्रदीप डिमरी को रोता बिलखता छोड़ गए। दीपक के छोटे भाई प्रदीप डिमरी सचिवालय में समीक्षा अधिकारी हैं। दीपक के चाचा राजेंद्र डिमरी ने बताया कि दीपक का राजीव गांधी कैसर रिसर्च सेंटर दिल्ली और टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट मुंबई में उपचार चल रहा था।
देहदान कर कई लोगों को जिंदगी दे गए डिमरी
दर्द अधिक होने पर पांच से दस अक्तूबर तक उन्हें हरिद्वार रोड स्थित कैलाश अस्पताल मेें आईसीयू में रखा गया था। परिजनों के मुताबिक लीवर कैंसर से पीड़ित दीपक के उपचार के दौरान डाक्टर जवाब दे चुके थे, इसके बावजूद दीपक में जीने की प्रबल इच्छा थी। उन्होंने काफी रिकवर भी किया, लेकिन मौत को वह मात नहीं दे पाए। दीपक आरएसएस पृष्टभूमि के थे। उनके निधन पर विधायक और पूर्व विधान सभा अध्यक्ष हरबंस कपूर, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, विधायक खजानदास, भरत चौधरी समेत कई राजनेताओं और अन्य लोगों ने शोक जताया है।
दीपक डिमरी के देहदान और नेत्रदान के संकल्प के चलते उनका अंतिम संस्कार नहीं किया गया। दीपक के परिजनों ने बताया कि दीपक ने नेत्र और देहदान का संकल्प लिया था, उन्होंने परिजनों को इसकी मौखिक जानकारी दी थी। उनकी इच्छा के अनुसार उनकी आंखों को श्री महंत इंदिरेश अस्पताल और देह को हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट को दान कर दिया गया है।
ऐसे कर सकते हैं अंगदान
आप भी अंगदान कर सीएम के ओएसडी दीपक डिमरी की तरह मौत के बाद भी किसी की जिंदगी बचा सकते हैं। इसकी प्रक्रिया ज्यादा मुश्किल नहीं है।
18 वर्ष से ऊपर का कोई भी व्यक्ति अंगदान कर सकता है, इससे कम उम्र के लोगों के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होती है। इसके तहत न केवल हार्ट और किडनी बल्कि कॉर्निया और त्वचा भी दान की जा सकती है।
मेडिकल कॉलेज के छात्रों के लिए पूरी देह भी दान की जा सकती है। देश में कई अस्पतालों के अलावा एनजीओ भी अंगदान के काम में लगे हुए हैं। एक शख्स द्वारा किए गए अंगदान से 50 जरूरतमंद लोगों की मदद हो सकती है।