{"_id":"6530290466315143740ebb84","slug":"chemistry-teacher-deepika-gupta-is-making-compost-at-dehradun-news-c-5-1-drn1030-269623-2023-10-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: मटकों में कंपोस्टिंग कर गीले कूड़े से खाद बना रहीं दीपिका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: मटकों में कंपोस्टिंग कर गीले कूड़े से खाद बना रहीं दीपिका
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
Iरसायन विज्ञान की शिक्षिका दीपिका गुप्ता दो साल से खुद करी कूड़े का निस्तारणI
रसायन विज्ञान की शिक्षिका दीपिका गुप्ता गीले कूड़े से घर में ही खाद बना रही हैं। वह गीले कूड़े की मटकों में कंपोस्टिंग करती हैं। पिछले दो साल से उन्होंने अपने घर का गीला कूड़ा नगर निगम के वाहन में नहीं दिया है। इस खाद का प्रयोग वह अपने किचन गार्डन में करती हैं और सब्जियां भी उगाती हैं।
विजय पार्क की हरिकुंज कॉलोनी की रहने वाली दीपिका गुप्ता बताती हैं कि गीला कूड़ा-सूखा कूड़ा अभी भी लोग अलग-अलग नहीं फेंकते। इससे कूड़ा निस्तारण में बड़ी समस्या आती है। उन्होंने कहा कि पहले वह अलग-अलग कर कूड़ा निगम की गाड़ी में देती थीं, लेकिन कई बार वाहन पर मौजूद युवक गीले-सूखे कूड़े को एक ही डिब्बे में डाल देते थे। इसके बाद उन्होंने गीले कूड़े का निस्तारण घर में करने का निर्णय लिया। पिछले दो साल से वह पुराने मटकों में कंपोस्टिंग कर खाद बना रही हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि अगर गीले और सूखे कूड़े को अलग-अलग नहीं निस्तारित किया जाएगा तो यह भविष्य में हमारी आने वाली पीढि़यों के लिए बड़ा खतरा बनेगा।
Iऐसे करतीं हैं निस्तारणI
दीपिका ने बताया कि मटके में कंपोस्ट बनाने के लिए उसमें चार-पांच छोटे छेद कर लेती हैं, जिससे ऑक्सीजन का प्रवाह बना रहे। मटके में नमी और गर्मी बनाए रखने के लिए इसे ऊपर से मिट्टी डालकर कवर किया जाता है। इस प्रोसेस में दो माह का समय लगता है। इसके बाद अपशिष्ट सड़ जाते हैं और मिट्टी का रूप ले लेते हैं। इस तरह जैविक खाद बन जाती है।
विज्ञापन
Iमिट्टी से बनातीं हैं गणपति और राखियांI
दीपिका गुप्ता बताती हैं कि सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करतीं। गणेश पूजा में प्लास्टर ऑफ पेरिस के गणपति लाने के बजाय घर पर ही मिट्टी के गणपति बनाती हैं। मिट्टी की राखियां बनाकर उन्हें अन्य लोगों को भी देती हैं। इसके लिए वह कई महिलाओं को प्रशिक्षण भी दे चुकी हैं।
I
I
I
I
Iदीपिका गुप्ता का प्रयास सराहनीय हैं। अन्य महिलाओं को इनसे प्रेरित होना चाहिए। गीला कूड़ा निस्तारण के लिए कंपोस्ट विधि से खाद बनाने की ट्रेनिंग लेकर घर पर ही जैविक खाद तैयार करनी चाहिए। नगर निगम से वार्ता कर इसके प्रशिक्षण की भी व्यवस्था कराई जाएगी।
I
I- सोनिका, डीएम, देहरादूनI