चार धाम यात्रा करीब, लेकिन बजट और सुविधाएं गायब
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चारधाम यात्रा की तारीख करीब आने के तैयारियां ने रफ्तार नहीं पकड़ी है। धामों और यात्रा मार्गों पर यात्री सुविधाएं नदारद हैं।
गंगोत्री-यमुनोत्री धाम की यात्रा शुरू होने में 19 दिन शेष रह जाने के बावजूद सुविधाओं के इंतजाम को जरूरी बजट भी विभागों के पास नहीं है।
केदारनाथ धाम में आपदा से पूरी तरह उजड़ चुके व्यवसायी कारोबार शुरू करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इन हालातों में यहां भी यात्री सुविधाओं का क्या हाल होगा, इसका आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
उधर बीआरओ ने बदरीनाथ हाईवे को ऋषिकेश से बदरीनाथ तक वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया है, लेकिन यह मार्ग लामबगड़ से बैनाकुली तक तीन किमी तक जोखिमभरा बना हुआ है।
अभी तक विभागों को बजट नहीं मिल पाया
उत्तरकाशी में यमुनोत्री और गंगोत्री धाम एवं यात्रा मार्ग में बिजली, पानी, स्वास्थ्य आदि सुविधाओं के लिए बजट प्रस्ताव जिला प्रशासन की ओर से यात्रा प्रशासन संगठन ऋषिकेश को भेज दिए गए थे, लेकिन दो माह बाद भी अभी तक विभागों को बजट नहीं मिल पाया।
ऐसे में सरकारी सुस्ती का खामियाजा तीर्थयात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। धनाभाव होने से गंगोत्री-यमुनोत्री धाम यात्रा मार्ग पर पानी की व्यवस्था भी नहीं हो पाई है।
जानकीचट्टी से लेकर यमुनोत्री तक पैदल मार्ग पर सभी स्टैंड पोस्ट खराब पड़े हैं। यात्रा मार्ग की कई पेयजल योजनाएं जुगाड़ से चल रही है। यमुनोत्री पैदल मार्ग का भी बुरा हाल है।
व्यापारी कहां से शुरू करें कारोबार
एक ओर सरकारी मशीनरी केदारनाथ यात्रा की तैयारियों में लगी हुई है, वहीं दूसरी ओर यात्रा मार्ग पर व्यवसाय करने वाले व्यापारी और तीर्थ पुरोहित इस उधेड़बुन में हैं कि क्या उनका व्यवसाय दोबारा से शुरू हो पाएगा।
व्यापारी शासन से यात्रा मार्ग पर व्यवसाय चलाने के लिए भूमि चाहते हैं। जलप्रलय में केदारनाथ से लेकर तिलवाड़ा तक कई होटल, दुकान, रेस्टोरेंट, धर्मशाला, लॉज और ढाबे बह गए थे।
सबसे बुरी स्थिति सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 20 किलोमीटर मार्ग पर है। गौरीकुंड (आधा हिस्सा) और रामबाड़ा में दोबारा निर्माण लायक जमीन बची नहीं है। भीमबली से केदारनाथ तक पैदल मार्ग भी बदल चुका है।
अब मार्ग मंदाकिनी नदी के दूसरी ओर लिनचोली से होकर गुजर रहा है, इसलिए रामबाड़ा से ऊपर गरुड़चट्टी और घिनुरपाणी में दोबारा व्यवसाय शुरू होने की संभावना नहीं है। केदारनाथ धाम में दुकानें मलबे में दबी हुई हैं।
केदारनाथ में व्यवसाय करने वाले किशन लाल बगवाड़ी और महेंद्र शुक्ला बताते हैं कि आपदा में दुकानों के ध्वस्त होने से उनका रोजगार खत्म हो गया।
यात्रा तो शुरू हो जाएगी, लेकिन वह दोबारा व्यवसाय शुरू कैसे करें। यदि प्रशासन उनको यात्रा मार्ग पर जमीन दे देता, तो वह दोबारा से कुछ रोजगार शुरू कर पाते।
उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष प्रदीप बगवाड़ी का कहना है केदारनाथ यात्रा तभी सुचारु चल सकती है, जब स्थानीय व्यापारियों की पूर्ण सहभागिता हो।
गौरीकुंड और जंगलचट्टी भी सुनसान
पैदल मार्ग पर गौरीकुंड और जंगलचट्टी में दोबारा से व्यापार शुरू होने की पूरी संभावनाएं हैं। केदार यात्रा को कुछ ही दिन शेष हैं लेकिन यहां वीरानी छाई हुई है। गौरीकुंड में दुकानों में शटर डाउन हैं, वहीं जंगलचट्टी में कच्ची दुकानें खाली पड़ी हुई हैं।
बदरीनाथ धाम के कपाट पांच मई और श्री हेमकुंड साहिब के कपाट 25 मई को श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगे।
हाईवे को हालांकि ऋषिकेश से बदरीनाथ तक वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया है, लेकिन यहां लामबगड़ से बैनाकुली तक तीन किमी का हिस्सा जोखिमभरा बना हुआ है।
आपदा में यहां सड़क अलकनंदा में समा गई है। बीआरओ ने बैनाकुली के जंगल से होकर नई सड़क बनाई है। कंचनगंगा में हिमखंड हटाने का कार्य अभी भी चल रहा है।
यहां पर चट्टान से रह-रहकर हिमखंड टूटकर हाईवे पर आ रहे हैं। कंचनगंगा से देश के अंतिम गांव माणा तक हाईवे सही हालत में है।
गड्ढों के भरान के लिए शासन ने लोनिवि को पांच करोड़ की धनराशि जारी की है। इन दिनों लोनिवि गौचर से जोशीमठ तक हाईवे के बीचोंबीच गड्ढों को भरने का कार्य करा रहा है।
बदरीनाथ हाईवे प्रमुख मार्ग
बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब यात्रा ऋषिकेश से गोविंदघाट तक बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर ही चलती है।
गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा 19 किमी पैदल करनी पड़ती है जबकि बदरीनाथ धाम तक जाने के लिए गोविंदघाट से 20 किमी अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।
गोविंदघाट से ही प्रसिद्ध फूलों की घाटी के लिए भी पैदल रास्ता जाता है। यहां से हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी के लिए 13 किमी पर स्थित घांघरिया से अलग-अलग रास्ते जाते हैं।
पांडुकेश्वर तक पहुंचा पानी
बदरीनाथ धाम के यात्रा पड़ाव पांडुकेश्वर तक ही पेयजल और बिजली की सप्लाई हो पाई है। यात्रा पड़ावों पर जल संस्थान पेयजल और ऊर्जा निगम बिजली का रख-रखाव करता है।
लामबगड़ और बिरही में जलप्रलय से पेयजल लाइन बह गई थी जो अभी तक नहीं बन सकी है। बिरही में जल संस्थान ने पानी के लिए हैंडपंप की व्यवस्था की है।
पैदल मार्ग पर हो सकती है पेयजल किल्लत
हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर तीर्थयात्रियों को इस बार पेयजल की किल्लत से जूझना पड़ सकता है। पिछले साल जलप्रलय से यात्रा के मुख्य पड़ाव घांघरिया और भ्यूंडार में पेयजल लाइन बह गई थी, जिसका निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।
गोविंदघाट स्थित गुरुद्वारे में भी पेयजल सप्लाई नहीं हो पाई है। जल संस्थान के अधिकारियों ने 15 मई को यात्रा पड़ावों पर पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था का दावा किया है।
बदरीनाथ यात्रा पड़ाव पर 91 स्टेंड पोस्ट स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 4 स्टेंड पोस्टों पर अभी तक पेयजल सप्लाई नहीं हुआ है। बदरीनाथ धाम में 26 अप्रैल तक पानी पहुंचा दिया जाएगा। कर्णप्रयाग में बंद पडे़ दो स्टेंड पोस्ट चालू कर दिए गए हैं। यात्रा से पूर्व बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब के यात्रा पड़ावों पर पेयजल आपूर्ति कर दी जाएगी।
- जेपी जोशी, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान, चमोली