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चारधाम यात्रा 2019: ब्रह्मवेला में खुले भगवान केदारनाथ के कपाट, मंदिर के बाहर लगी भक्तों की कतारें

Thu, 09 May 2019 04:28 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 09 May 2019 04:28 PM IST
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Char dham yatra 2019 kedarnath door open for devotees
मंदिर से कई सौ मीटर दूर तक लगी भक्तों की लंबी लाइन - फोटो : अमर उजाला

आज ब्रह्मवेला में प्रात: 5 बजकर 35 मिनट पर जय केदार के जयकारों के बीच भगवान केदारनाथ के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खुल गए। बाबा की पंचमुखी मूर्ति केदार मंदिर में विराजमान हुई। अब अगले छह महीने तक बाबा केदार यहीं पर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। ढाई हजार से अधिक भक्त शुभ असवर के साक्षी बने। वहीं राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने भी धाम पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन किए।

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तड़के बाबा केदार की उत्सव डोली को मुख्य पुजारी केदार लिंग द्वारा भोग लगाया गया। और नित पूजाएं की गई, जिसके बाद डोली को सजाया गया। केदारनाथ रावल भीमाशंकर लिंग, वेदपाठियों, पुजारियों, हक्क हकूकधारियों की मौजूदगी में कपाट पर वैदिक परंपराओं के अनुसार मंत्रौच्चारण किया गया। और 5 बजकर 35 मिनट पर कपाट खोले गए। इस दौरान डोली ने मंदिर में प्रवेश किया। सर्वप्रथम पुजारियों व वेदपाठियों ने गर्भगृह में साफ सफाई की और भोग लगाया। जिसके बाद मंदिर के अंदर पूजा अर्चना की गई। ठीक 6 बजे मुख्य कपाट भक्तों के दर्शनाथ खोल दिए गए।
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सेना की जम्मू-कश्मीर लाईट इंफेंटरी के बैंड की धुनों के साथ पूरा केदारनाथ भोले बाबा के जयकारों से गुंजायमान हो गया। इस दौरान केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग और पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद रमेश पोखरियाल निशंक सहित बीकेटीसी के सदस्य भी मौजूद रहे। इस बाबत श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा कपाटोद्घाटन की सभी तैयारियां पूरी कर ली थीं। गढ़वाल मंडल आयुक्त डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल सहित अन्य अधिकारी भी धाम में पहुंचे। आखिर में दी गई वीडियो के जरिए बनें इस पावन वेला के साक्षी...

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कपाट खुलने से पहले केदारनाथ धाम पहुंची पूजा सामग्री 

केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले एयरफोर्स की मदद से पूजा सामग्री मंदिर पहुंचाई गई। श्रद्धालुओं की सुखद व मंगलमय यात्रा की कामना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी स्थानों पर राज्य सरकार ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। चारधाम यात्रा के लिए राज्य सरकार तैयार है।
 
उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुविधा के लिए चारधाम सड़क के निर्माण कार्य को रोक दिया गया है। केदारनाथ पुनर्निर्माण का कार्य 80 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है, अवशेष पुनर्निर्माण कार्यों पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। बदरीनाथ धाम में भी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।



यहां यात्रियों को विवेकानंद स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। वहीं केदारनाथ धाम में भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने चार धाम यात्रा मार्गों पर प्रत्येक दो किलोमीटर पर चिकित्सकों की तैनाती की है।

वर्षभर की आजिविका की होती इसी दिन से शुरुआत

बाबा केदार धाम के कपाट खुलने का दिन केदारघाटीवासियों के लिए वर्ष का नया दिन जैसा है। इसी पावन दिन से उनकी वर्षभर की आजिविका शुरू होती है। बाबा केदार की यात्रा से केदारघाटी के 80 से अधिक गांवों के हजारों परिवार जुड़े हैं। जो यात्रामार्ग, पड़ावों व धाम में व्यवसाय करते हैं। इस वर्ष भी यात्रा को लेकर लोगों में खासा उत्साह है।

भगवान आशुतोष के 11वें ज्योतिर्लिंग बाबा केदार की यात्रा, केदारघाटी का जीवन भी है। यात्रा में गुप्तकाशी से केदारनाथ तक हजारों लोग रोजगार करते हैं, जिससे कई परिवारों की रोजी-रोटी चलती है। बाबा की यात्रा से केदारघाटी का बच्चा हो चाहे बड़ा, हर कोई जुड़ा हुआ है। केदारनाथ के वयोवृद्ध तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती बताते हैं, केदारनाथ यात्रा का शुभारंभ केदारघाटी के लिए वर्ष का नया दिन जैसा होता है।

इस दिन से यहां के लोग अपने नए कार्यो का शुभारंभ करते हैं। साथ व्यवसाय लेखाजोखा तैयार करते हैं। बाबा केदार, उनके आराध्य के साथ पालनकर्ता और संरक्षक भी हैं। यात्रा छह माह की होती है। लेकिन केदारघाटी के हजारों परिवारों को वर्षभर का रोजगार मिलता है। तीर्थ पुरोहित, सदियों से यात्रा में अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं। 

इस बार बाबा केदार की पैदल यात्रा रोचक व नए अनुभव भरी

केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा इस बार श्रद्धालुओं के लिए रोचक और नए अनुभवों को संजोने वाली साबित हो रही है। देश के विभिन्न प्रांतों से पहुंच रहे शिव भक्तों, विशेषकर युवा पीढ़ी विशालकाय हिमखंड व बर्फ की मोटी चादर देखकर गदगद हो रहे हैं।

वे, हिमखंडों के किनारे सेल्फी खींचकर इसे यादगार बना रहे हैं। बाबा के भक्तों को लिनचोली से केदारनाथ तक लगभग 4 किमी बर्फ को काटकर बनाये गए रास्ते से होकर धाम पहुंचना पड़ रहा है। केदारनाथ मंदिर परिसर में काफी बड़े हिस्से से बर्फ की सफाई कर दी गई है। यहां मंदिर की भव्यता सबको आकर्षित कर रही है। 

रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड पैदल मार्ग पर छोटी लिनचोली के बाद बर्फ के दर्शन हो रहे हैं। कुछ जगहों पर बर्फ की ऊंची-ऊंची दीवारों के बीच से श्रद्धालु धाम पहुंच रहे हैं। यह दृश्य देखकर मैदान प्रांतों से पहुंच रहे श्रद्धालु खुश हो रहे हैं। दिल्ली के रमेश शर्मा, निकिता, सुदेश, राजस्थान के अंशराम ने बताया कि वे पहली बार केदारनाथ यात्रा पर आ रहे हैं। यहां बर्फ को देखकर नया अनुभव मिला है। आज तक, टेलीविजन में भी बर्फबारी के दृश्यों को देखा था। लेकिन यहां विशालयकाय हिमखंड नजर आ रहे हैं।

छानी कैंप से रुद्रा प्वाइंट के बीच तीन स्थानों पर श्रद्धालु 12 फीट ऊंची बर्फ की दो तरफा दीवारों के बीच से आगे बढ़ रहे हैं। यह हिस्सा पूरे पैदल मार्ग का सबसे रोमांचक है। जून 2013 की आपदा के बाद यह पहला मौका है, जब केदारनाथ यात्रा में मई माह के दूसरे सप्ताह में भी पैदल मार्ग व धाम में कई फीट बर्फ मौजूद है। केदारनाथ पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के पूर्व प्राचार्य कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल ने बताया कि बीते पांच वर्षो में शीतकाल में पैदल मार्ग लिनचोली से रुद्रा प्वाइंट के बीच हमेशा ही संवेदनशील रहा है।

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