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चंद्रयान-2: चांद पर 'विक्रम' की सॉफ्ट लैंडिंग होते ही हिंदी भाषा भी रचेगी इतिहास, पीछे है ये वजह

Sat, 07 Sep 2019 10:09 AM IST
अलका त्यागी डॉ. गिरीश रंजन तिवारी, अमर उजाला, नैनीताल
डॉ. गिरीश रंजन तिवारी, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 07 Sep 2019 10:09 AM IST
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Chandrayaan 2 Soft Landing on Moon Hindi Language will also make History
चंद्रयान-2 - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

सात सितंबर की तारीख शुरू होने के साथ ही जब भारतीय लैंडर विक्रम चांद की सतह पर उतरेगा तो वैज्ञानिक सफलता के नए मुकाम के साथ ही हिंदी भाषा को लेकर भी एक इतिहास रचा जाएगा।

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लैंडर और रोवर के चांद पर उतरने के साथ ही हिंदी भाषा भी पहली बार चांद पर पहुंच जाएगी। वह भी हिंदी सप्ताह के पहले दिन, क्या गजब का संयोग है! यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि चंद्र अभियान से जुड़े सभी उपकरणों के नाम इसरो ने हिंदी भाषा में रखे हैं।
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चंद्रयान को अंतरिक्ष में ले जाने वाला स्वदेशी तकनीक से बना राकेट बाहुबली, लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान है। विज्ञानी खुश हैं कि रोवर प्रज्ञान विभिन्न अध्ययनों के अलावा चांद पर इसरो और अशोक की लाट के चिन्ह छोड़ेगा लेकिन यह भी एक उपलब्धि ही कही जाएगी कि ये चांद पर हिंदी के निशान भी छोड़ेगा।

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छोड़े गए हर सैटेलाइट, राकेट और मिसाइल का नाम हिंदी में

इसरो ने आज तक तकनीकी नामों को छोड़ कर अपने द्वारा छोड़े गए हर सैटेलाइट, राकेट और मिसाइल का नाम हिंदी में ही रखा है। यह सिलसिला 1975 में छोड़े गए भारत के पहले उपग्रह आर्यभट्ट से आज तक जारी है।

आर्यभट्ट केवल 9 दिन ही कक्षा में रह पाया था लेकिन 1979 में भास्कर सफल रहा। इसके बाद इसरो ने 1981 में रोहिणी श्रृंखला प्रारंभ की। इनके तहत अनेक उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे गए।इसरो ने अपनी हर मिसाइल का भी नाम हिंदी में ही रखा है जिनमें पृथ्वी, धनुष, अग्नि, त्रिशूल, नाग, आकाश शामिल हैं।

इसरो की एंटी सैटेलाइट मिसाइल का नाम शक्ति रखा गया है। वर्ष 2014 में मंगल ग्रह अभियान पर जाने वाला मंगलयान था। वर्ष 2021 में सात दिन के लिए तीन यात्रियों को अंतरिक्ष में ले जाने वाले स्पेसलिफ्टर को गगनयान नाम दिया गया है। विदेशी उपग्रहों को छोड़ने वाली इसरो की व्यावसायिक शाखा का नाम अंतरिक्ष रखा गया है। 

युद्धपोत और पनडुब्बियों के नाम भी हिंदी में

यह भी एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि भारत के सारे युद्धपोतों और पनडुब्बियों के नाम भी हिंदी में ही रखे गए हैं। इनमें युद्धपोत विक्रमादित्य, ब्रह्मपुत्र, चक्र, अरिघात, अरिहंत, सह्याद्रि, शिशुमार, शिवालिक, तरकश, तलवार, मैसूर, कोलकाता आदि शामिल हैं।

भारतीय पनडुब्बियों के नाम करंज, वेला, चक्र, शल्की, शंकुश, सिंधुघोष, सिंधुकीर्ति, सिन्धुविजय, सिंधुराष्ट्र, सिन्धुध्वज, सिंधुवीर आदि शामिल हैं।

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