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हरीश रावत को झटका, केंद्र ने उत्तराखंड की बड़ी योजनाओं पर लगाई रोक

Wed, 15 Jun 2016 09:11 AM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 15 Jun 2016 09:11 AM IST
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central government stops Various Schemes in uttarakhand
हरीश रावत - फोटो : file photo

केंद्र सरकार ने भवन निर्माण सेस के मनमाने खर्च और इससे किसी भी तरह के निर्माण करने पर रोक लगा दी है। इस रोक को चुनावी वर्ष में मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

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उत्तराखंड के मायने में यह रोक इसलिए महत्वपूर्ण है कि पिछले पांच-छह दिनों के भीतर इस सेस की मद में एकत्रित धनराशि से श्रमिकों के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित करने की घोषणाएं की गईं थीं और इनमें अधिकांश में निर्माण होना था। मंगलवार को भी प्रमुख सचिव मनीषा पंवार की अध्यक्षता में इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए बैठक हुई, लेकिन इसके एक घंटे बाद ही केंद्रीय श्रम मंत्रालय से रोक संबंधी पत्र आ गया।
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बीते बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव ने भवन निर्माण श्रमिकों के हित में तमाम सुविधाएं और योजनाएं शुरू करने संबंधी आदेश जारी किए थे। इस क्रम में श्रमिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश के चिकित्सालयों में 100 बेड आरक्षित किए जाने के साथ ही श्रमिकों के आश्रितों को नर्सिंग कालेजों में 75 सीटें आरक्षित करने का निर्णय लिया गया था।
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इसके अलावा उनकी क्षमता विकास के लिए कुमाऊं एवं गढ़वाल में एक-एक आईटीआई निर्माण करने की बात भी तय हुई थी। बड़े पैमाने पर संपन्न किए जाने वाले इन निर्माण कार्य के लिए धनराशि की व्यवस्था भवन एवं अन्य सन्न निर्माण कर्मकार कल्याण निधि (वीओसीडब्लू) से होनी थी।

केंद्रीय श्रम मंत्रालय से आई चिट्ठी

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हरीश रावत - फोटो : ANI

इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए मंगलवार को प्रमुख सचिव मनीषा पंवार की अध्यक्षता में बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स (बीओसीडब्ल्यू) बोर्ड की बैठक हुई। इसमें इन योजनाओं को धरातल पर लाने संबंधी चर्चा हुई। भवन निर्माण सेस के मद में सरकार के पास 140 करोड़ रुपये खजाने में है। यह सारा व्यय इसी राशि से होना था।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक दिन में करीब एक बजे समाप्त हुई। इसके करीब एक घंटे बाद केंद्रीय श्रम मंत्रालय से एक चिट्ठी प्रमुख सचिव कार्यालय में आई। इस पत्र में सभी राज्यों को भवन निर्माण सेस से किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य में व्यय न करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रमुख सचिव मनीषा पंवार ने बताया कि निर्माण सेस में एकत्र होने वाली मद में केंद्रीय श्रम मंत्रालय के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। ऐसे में अब निर्माण संबंधी योजनाएं फिलहाल पूरी नहीं की जा सकेंगी। इस बाबत मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा।

सोची-समझी रणनीति तो नहीं!
केंद्रीय श्रम मंत्रालय का जो पत्र मंगलवार को शासन में आया उस पर सात जून की तिथि अंकित है। पत्र में यह भी स्पष्ट है कि यह आदेश सभी प्रदेशों के लिए है। ऐसे में चर्चा है कि इसकी जानकारी राज्य सरकार को पूर्व में ही मिल चुकी थी। बावजूद इसके निर्माण श्रमिकों के हित में तमाम घोषणाएं कर दी गईं। चर्चा तो यह भी है कि बजट को लेकर पहले ही कांग्रेस के निशाने पर आई भाजपा पर हमला बोलने के लिए यह सोची-समझी रणनीति भी हो सकती है।

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