Uttarakhand News: जनगणना बताएगी घोस्ट विलेज की संख्या, प्रदेश में पलायन के बाद खाली हो चुके गांव
जनगणना बताएगी कि प्रदेश में कितने घोस्ट विलेज हैं। वर्ष 2011 की जनगणना में प्रदेशभर में 1048 गांव खाली हो चुके थे। जनगणना निदेशालय सभी गांवों की गणना करेगा।
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प्रदेश में 25 अप्रैल से शुरू होने वाली जनगणना के बाद पता चलेगा कि उत्तराखंड में पलायन के बाद खाली हो चुके गांव (घोस्ट विलेज) की संख्या कितनी बढ़ी है। जनगणना निदेशालय ने सभी गांवों की गणना का फैसला लिया है, जिससे राज्य में पलायन और रिवर्स पलायन की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
वर्ष 2011 की जनगणना में प्रदेश में कुल 16,793 गांव थे, जिनमें से 1048 गांव ऐसे थे जो पलायन के कारण खाली हो चुके थे। प्रदेश में पलायन बड़ा मुद्दा रहा है, जिस कारण सरकार ने पलायन आयोग का भी गठन किया था। यह पलायन आयोग तेजी से रिवर्स पलायन पर काम कर रहा है। तस्वीर बदल तो रही है लेकिन असल में क्या बदला है, यह अब सामने आएगा।
निदेशक जनगणना इवा आशीष श्रीवास्तव के मुताबिक, हमारी टीम हर गांव तक पहुंचेगी। वहां पहले चरण में 25 अप्रैल से 24 मई के बीच भवन गणना का काम होगा। इसके बाद अगले साल नौ से 28 फरवरी के बीच जनगणना की जाएगी। उन्होंने बताया कि 2011 की जनगणना में गैर आबाद गांवों की संख्या 1048 थी। 16 साल बाद प्रदेश में कितने घोस्ट विलेज बढ़े, इसकी असल संख्या पता चलेगी
2011 में किस जिले में कितने गांव, कितने घोस्ट विलेज
| जिला | कुल गांव | घोस्ट विलेज |
| उत्तरकाशी | 707 | 13 |
| चमोली | 1246 | 76 |
| रुद्रप्रयाग | 688 | 35 |
| टिहरी | 1862 | 88 |
| देहरादून | 748 | 17 |
| पौड़ी | 3473 | 331 |
| पिथौरागढ़ | 1675 | 103 |
| बागेश्वर | 947 | 73 |
| अल्मोड़ा | 2289 | 105 |
| चंपावत | 717 | 55 |
| नैनीताल | 1141 | 44 |
| यूएस नगर | 688 | 14 |
| हरिद्वार | 612 | 94 |
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नौ मार्च से देहरादून में मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण
जनगणना निदेशालय उत्तराखंड की ओर से नौ मार्च से देहरादून में मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण शुरू कराया जा रहा है। इन्हें मकान सूचीकरण, मकान गणना के दौरान बरती जाने वाली सभी सावधानियों के साथ ही मोबाइल एप या पोर्टल के माध्यम से एंट्री की बारीकियां बताई जाएंगी। ये मास्टर ट्रेनर ही बाद में प्रदेशभर में अलग-अलग जगहों पर जनगणना की ट्रेनिंग देंगे।