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अब सेंसर बताएगा नदी का पानी कितना साफ
सुमित जोशी, अमर उजाला, नैनीताल
Updated Mon, 07 May 2018 10:07 AM IST
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नैनी झील
- फोटो : अमर उजाला
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अब पानी की स्वच्छता जांचने के लिए उसके नमूनों को प्रयोगशाला भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पानी की स्वच्छता की रिपोर्ट अब ऑनलाइन मिल सकेगी।
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इसके लिए ऐसा उपकरण ईजाद किया गया है जो पानी के पीएच, टर्मिनिटी, टीडीएस और तापमान की जानकारी निर्धारित समय में मुहैया कराने के साथ ही दूषित जल के स्रोत का भी पता बताएगा। यह जानकारी उपकरण में लगाए गए छोटे सेंसरों से मिलेगी। इस डिवाइस को नदी के पास स्थापित किया जाएगा।
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बिड़ला इंस्टीट्यूट के आईटी विभाग ने उत्तराखंड साइंस एजूकेशन एंड रिसर्च सेंटर (यूएसईआरसी) देहरादून की मदद से वाटर क्वालिटी की जांच करने के लिए एक ऐसा डिवाइस तैयार किया है, जो निर्धारित समय में पानी की स्वच्छता के आंकड़े उपलब्ध कराएगा। इंस्टीट्यूट ने इस प्रोजेक्ट को आईओटी बेस्ड वाटर मॉनीटरिंग सिस्टम नाम दिया है। इस डिवाइस की सहायता से पानी की स्वच्छता जांच के लिए नदियों और झीलों के पानी के नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला नहीं भेजना पड़ेगा क्योंकि यह डिवाइस स्वच्छ जल के पैमानों के आधार पर अपनी रिपोर्ट ऑनलाइन देगा।
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यूएसईआरसी के निदेशक प्रो.दुर्गेश पंत इस प्रोजेक्ट का ट्रायल ले चुके हैं।
इस प्रयोग के सहायक परियोजना अधिकारी डॉ.आशुतोष भट्ट ने बताया कि इंस्टीट्यूट में तैयार हुआ डिवाइस अभी ट्रायल मोड में है। उपकरण में छोटे सेंसर लगाए गए हैं, जो पानी के तापमान, पीएच, टर्मिनिटी और टीडीएस की जानकारी देंगे। उन्होंने बताया कि इस डिवाइस को नदी के पास स्थापित किया जाएगा। साथ ही उसमें लगे सेंसरों को नदी में छोड़ा जाएगा। डिवाइस में जीपीएस भी लगाया गया है, जिसकी सहायता से पानी की स्वच्छता की रिपोर्ट सर्वर के माध्यम से ऑनलाइन मिल सकेगी। सरकारी परियोजना होने के चलते इसका सर्वर देहरादून में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि परियोजना कार्य पूरा होने के बाद सचिव साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सामने इसका प्रस्तुतीकरण होगा।
गंगा के स्वच्छता स्तर की भी होगी जांच
डॉ.आशुतोष भट्ट ने बताया कि परियोजना कार्य पूरा होने के बाद इस डिवाइस को सबसे पहले नैनीझील और भीमताल झील के पास लगाया जाएगा। इसके बाद उत्तराखंड में ही अन्य नदियों में इसे स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गंगा सफाई अभियान की दृष्टि से भी ये कारगर हो सकता है, इसलिए इसे गंगा नदी में भी लगाया जाएगा, जिससे गंगा की सफाई में जुटी सरकार और तमाम संस्थाओं को काफी सहायता मिल सकेगी।
अगर यह प्रयोग सफल होता है, तो उत्तराखंड के लिए गौरव की बता होगी कि राज्य के एक संस्थान के छात्रों और प्राध्यापकों ने मिलकर पानी जांच के लिए एक आधुनिक उपकरण तैयार किया है। साथ ही यह नीति निर्माताओं को स्वच्छ पेयजल प्रबंधन के लिए भी सहायता प्रदान कर सकेगा।
-प्रो. दुर्गेश पंत, निदेशक यूएसईआरसी
नदियों में गिरने वाले नाले नदी के ईको सिस्टम को खराब कर देते हैं, जिससे पानी में रहने वाले जीवों के साथ ही मानव को दूषित पानी से परेशानी होने लगती है। इसे देखते हुए यूएसईआरसी के सहयोग से डिवाइस तैयार किया जा रहा है। इस डिवाइस की सहायता से पानी को दूषित करने वाले स्रोतों का पता लगने के साथ ही उनका ट्रीटमेंट किया जा सकेगा।
-प्रो.बीएस बिष्ट, निदेशक बीआईएएस, भीमताल