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कार्रवाई: सीबीआई ने नोएडा और उत्तराखंड में 14 जगहों पर मारे छापे, बरामद हुए कई आपत्तिजनक दस्तावेज 

Fri, 09 Jul 2021 10:44 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 09 Jul 2021 10:44 PM IST
सार

सीबीआई मुख्यालय के मुताबिक शिकायत प्राप्त हुई थी कि वर्ष 2014 से 2016 तक अपने कार्यकाल के दौरान तत्कालीन कुलपति गढ़वाल विश्वविद्यालय की ओर कॉलेजों को संबद्धता देने के मामले में गंभीर अनियमितताएं की गई हैं।

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CBI raids 14 places in Noida and Uttarakhand for wrongly affiliating colleges Case
सीबीआई रेड - फोटो : पीटीआई

विस्तार

गलत तरीके से कॉलेजों की संबद्धता के मामले में सीबीआई ने शुक्रवार को एनएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति सहित 17 अन्य आरोपियों के देहरादून, श्रीनगर गढ़वाल व नोएडा में स्थिति 14 आवासीय परिसरों और कार्यालयों में छापा मारा। देहरादून में 12 और नोएडा व श्रीनगर में एक-एक जगह सीबीआई ने छापा मारा गया। कुलपति और ओएसडी के विभिन्न बैंकों में तीन लॉकरों को भी खंगाला गया, जिनसे सीबीआई ने मामले से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद किए हैं। जांच के बाद सीबीआई ने मामले में कुलपति, उनके ओएसडी, अन्य आरोपियों और छह निजी संस्थानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। 

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सीबीआई मुख्यालय को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन कुलपति की ओर से अपने ओएसडी और विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर नियमों के विपरीत विभिन्न कॉलेजों, निजी संस्थानों के संबद्धता को आगे बढ़ाकर जारी रखा। जिसके बाद मामले की जांच की गई। जांच पूरी होने के बाद शुक्रवार को सीबीआई ने तत्कालीन कुलपति गढ़वाल विश्वविद्यालय, उनके ओएसडी सहित अन्य आरोपियों के देहरादून, श्रीनगर उत्तराखंड, नोएडा के 14 आवासीय परिसरों और कार्यालयों पर एक साथ छापा मारा। 
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सीबीआई के मुताबिक इस दौरान कुलपति और उनके ओएसडी के विभिन्न बैंकों में तीन लॉकरों को भी खंगाला गया। जिनसे सीबीआई को इस मामले से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी मिले। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने तत्कालीन कुलपति एचएनबी विश्वविद्यालय, उनके ओएसडी सहित अन्य आरोपियों और छह निजी संस्थानों के खिलाफ छह अलग-अलग मामलों में मुकदमा दर्ज किया गया हैं। मामले में सीबीआई की जांच जारी है।

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पूर्व कुलपति प्रो. जेएल कौल के समय का है प्रकरण

एचएनबी गढ़वाल (केंद्रीय) विश्वविद्यालय में संबद्धता प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मामला तत्कालीन कुलपति जेएल कौल के कार्यकाल का है। 3 दिसंबर 2014 को गढ़वाल विवि के कुलपति बनने के बाद प्रो. जेएल कौल के कार्यकाल में निजी शिक्षण संस्थानों की संबद्धता और सीटों की वृद्धि की शिकायत एमएचआरडी (मानव संसाधन विकास मंत्रालय) से की गई थी। इस पर एमएचआरडी ने शिकायतों की प्राथमिक जांच के लिए समिति (फैक्ट फाइंडिग कमेटी) का गठन किया था। समिति की रिपोर्ट के बाद एमएचआरडी ने राष्ट्रपति (विवि के विजीटर) से प्रो. कौल को हटाने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, इससे पूर्व प्रो. कौल ने इस्तीफा भेज दिया था, जिसे स्वीकार नहीं किया गया। राष्ट्रपति की अनुमति मिलने के बाद 29 दिसंबर 2017 को प्रो. कौल को पदमुक्त कर दिया गया। बाद में यह मामला सीबीआई को दे दिया गया। कार्य परिषद की मई 2020 में आयोजित बैठक में केस दर्ज करने की अनुमति दे दी गई।

क्या है मामला
मामला शहर के कुछ नामी प्राइवेट शिक्षण संस्थानों से जुड़ा हुआ है। इन संस्थानों में नए कोर्स शुरू करने के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं था। बावजूद इनमें न सिर्फ सीटें बढ़ाईं गईं बल्कि नए कोर्स के लिए भी मान्यता दी गई। आरोप है कि यह सब तत्कालीन कुलपति जेएल कौल और उनके ओएसडी की जानकारी में हुआ। 2012 से 2017 तक हुए इस खेल में सीबीआई जांच 2018 में शुरू हुई। आरोप यहां तक है कि इसके लिए पैसों का लेनदेन भी हुआ। यही नहीं, मान्यता और संबद्धता के लिए जरूरी सारे नियम कायदों को ताक पर रखा गया।

ये हैं आरोपी शिक्षण संस्थान
अल्पाइन इंस्टीट्यूट, बाबा फरीद इंस्टिट्यूट, उत्तरांचल कॉलेज, दून पीजी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, दून वैली कॉलेज ऑफ एजुकेशन। सीबीआई के अनुसार इन संस्थानों के छह आफिस और इनके मालिकान के घरों व बैंक में कुल 12 जगह सीबीआई की टीम ने महत्वपूर्ण दस्तावेज हासिल किए हैं। इसके अलावा एक जगह श्रीनगर और नोएडा में जेएल कौल के  घर छापा मारा गया है।

हाई कोर्ट के आदेश को किया था दरकिनार
मान्यता देने में उस वक्त यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने हाईकोर्ट के आदेश को भी दरकिनार किया था। इसमें विभिन्न कोर्सों के लिए संस्थानों में क्या-क्या सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए इसका एक नियम तय किया था।

देहरादून में 12 श्रीनगर में एक और नोएडा में भी एक जगह सचिन की गई है। सीबीआई टीमों को कुछ दस्तावेज मिले हैं इनका अवलोकन किया जा रहा है। इस मामले में जून अंत में कुल छह मुकदमे दर्ज किए गए थे।
- पीके पाणिग्रही, एसपी सीबीआई देहरादून

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