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Dehradun News: तेज बहाव ने तोड़ी चहारदीवारी, आसन में बह गई सैकड़ों टन कूड़ा व गंदगी
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बुधवार की देर रात जंगल से आए तेज बहाव के पानी ने शीशमबाड़ा स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र की चहारदीवारी को धराशायी कर दिया। इससे सैकड़ों टन कूड़ा और गंदगी आसन नदी में बह गई। पछवादून संयुक्त समिति के सचिव राजेंद्र गंगसारी ने घटना पर कड़ी नाराजगी जताते हुए एनजीटी में शिकायत करने की बात कही है।
पछवादून में बुधवार देर रात हुई तेज बारिश के बाद क्षेत्र के नदी-नाले उफान पर आ गए। कई जगहों पर जलभराव हो गया। इसी क्रम में संरक्षित वन क्षेत्र से बहकर आए तेज बहाव के पानी ने शीशमबाड़ा स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र की चहारदीवारी को गिरा दिया। इससे सैकड़ों टन कूड़ा बहकर नदी में चला गया। गीले कचरे से निकलने वाला जहरीला लीचेट भी पानी के साथ आसन नदी में घुल गया। बता दें कि सेलाकुई के धूलकोट स्थित संरक्षित वन क्षेत्र की तलहटी पर बने कूड़ाघर को हर साल बरसात में जंगल से बहकर आने वाला तेज बहाव का पानी निशाना बनाता है। इससे पहले भी दो बार कूड़ाघर की दीवार गिरने और कूड़ा-लीचेट बहकर नदी में जाने की घटना हो चुकी है। पछवादून संयुक्त समिति की सदस्य सपना शर्मा ने बताया कि स्थानीय निवासी क्षेत्र के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कूड़ाघर को हटाने के लिए कई साल से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन शासन स्तर पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
लीचेट एकत्रित करने के लिए कूड़ाघर में नहीं है कोई व्यवस्था
शीशमबाड़ा में कूड़े के पहाड़ों से निकलने वाला लीचेट जहरीला व पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला तरल पदार्थ होता है। यह बहकर आसन नदी में चला जाता है। लीचेट को नदी में जाने से रोकने और उसके निस्तारण के लिए कूड़ाघर प्रबंधन के पास कोई व्यवस्था नहीं है। प्रबंधन ने कूड़ाघर की बाउंड्री के साथ खुदाई करके एक कच्चा नाला तैयार किया हुआ है। इसमें यह लीचेट जमा होता रहता है। जब इसकी मात्रा अधिक हो जाती है तो चहारदीवारी पर उसका दबाव भी बना रहता है।
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कूड़ा निस्तारण केंद्र में हुई मौजूदा घटना को प्राकृतिक आपदा के रूप में देखा जाना चाहिए। बरसात में आए तेज बहाव के पानी से चहारदीवारी का एक हिस्सा गिरा है। इसे ठीक करने के लिए तत्काल कार्य शुरू करा दिया गया है। साथ ही स्थिति का मौका मुआयना करके कूड़ा और लीचेट के नदी में बहने की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
डाॅ. अविनाश खन्ना, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
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पछवादून में बुधवार देर रात हुई तेज बारिश के बाद क्षेत्र के नदी-नाले उफान पर आ गए। कई जगहों पर जलभराव हो गया। इसी क्रम में संरक्षित वन क्षेत्र से बहकर आए तेज बहाव के पानी ने शीशमबाड़ा स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र की चहारदीवारी को गिरा दिया। इससे सैकड़ों टन कूड़ा बहकर नदी में चला गया। गीले कचरे से निकलने वाला जहरीला लीचेट भी पानी के साथ आसन नदी में घुल गया। बता दें कि सेलाकुई के धूलकोट स्थित संरक्षित वन क्षेत्र की तलहटी पर बने कूड़ाघर को हर साल बरसात में जंगल से बहकर आने वाला तेज बहाव का पानी निशाना बनाता है। इससे पहले भी दो बार कूड़ाघर की दीवार गिरने और कूड़ा-लीचेट बहकर नदी में जाने की घटना हो चुकी है। पछवादून संयुक्त समिति की सदस्य सपना शर्मा ने बताया कि स्थानीय निवासी क्षेत्र के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कूड़ाघर को हटाने के लिए कई साल से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन शासन स्तर पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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लीचेट एकत्रित करने के लिए कूड़ाघर में नहीं है कोई व्यवस्था
शीशमबाड़ा में कूड़े के पहाड़ों से निकलने वाला लीचेट जहरीला व पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला तरल पदार्थ होता है। यह बहकर आसन नदी में चला जाता है। लीचेट को नदी में जाने से रोकने और उसके निस्तारण के लिए कूड़ाघर प्रबंधन के पास कोई व्यवस्था नहीं है। प्रबंधन ने कूड़ाघर की बाउंड्री के साथ खुदाई करके एक कच्चा नाला तैयार किया हुआ है। इसमें यह लीचेट जमा होता रहता है। जब इसकी मात्रा अधिक हो जाती है तो चहारदीवारी पर उसका दबाव भी बना रहता है।
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कूड़ा निस्तारण केंद्र में हुई मौजूदा घटना को प्राकृतिक आपदा के रूप में देखा जाना चाहिए। बरसात में आए तेज बहाव के पानी से चहारदीवारी का एक हिस्सा गिरा है। इसे ठीक करने के लिए तत्काल कार्य शुरू करा दिया गया है। साथ ही स्थिति का मौका मुआयना करके कूड़ा और लीचेट के नदी में बहने की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
डाॅ. अविनाश खन्ना, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।