आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ मुकदमा दर्ज
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बाबा रामदेव के सहयोगी एवं पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ बिना अनुमति के हैलीकॉप्टर उतारने के मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया है। सूचना आयोग के हस्तक्षेप पर कनखल पुलिस ने कार्रवाई की।
26 जून 2012 को आचार्य बालकृष्ण ने गुरुकुल कांगड़ी विवि के मैदान में हैलीकॉप्टर उतारा था। पुलिस ने आचार्य से हैलीकॉप्टर उतरने संबंधित अनुमति पत्र दिखाने को कहा, लेकिन पायलट पत्र नहीं दिखा पाया। इसकी रिपोर्ट पुलिस ने प्रशासन को भी दी। लेकिन मामला दब गया।
सूचना आयुक्त की सख्ती पर मामला दर्ज
उसके बाद आरटीआई कार्यकर्ता रमेश चंद्र शर्मा ने बिना अनुमति के हैलीकॉप्टर उतरने के मामले में क्या कार्रवाई हुई इसकी जानकारी सूचना के अधिकार के तहत पुलिस-प्रशासन से मांगी। लेकिन पुलिस-प्रशासन एक-दूसरे के पाले में गेंद डालते रहे। मामला सूचना आयोग तक पहुंचा।
पांच जुलाई 2014 को सूचना आयुक्त ने प्रशासन को तलब किया। सिटी मजिस्ट्रेट केके मिश्रा ने आयोग में पक्ष रखा कि उन्होंने पुलिस को इस संबंध में अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी, जिसमें बिना अनुमति के हैलीकॉप्टर उतरना बताया गया।
बालकृष्ण ने कंपनी को बताया जिम्मेदार
तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट ने भी 26 दिसंबर 2013 को एसएसपी को रिपोर्ट सौंप दी थी। इसके बाद सूचना आयुक्त ने एसएसपी, एसपी या सीओ को 30 जुलाई (बुधवार) को तलब किया था।
इससे पहले ही पुलिस ने 29 जुलाई (मंगलवार) सुबह 11 बजे कनखल थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया। मामले की जांच एसआई भावना कैंथोला को सौंपी गई है। उन्होंने इसकी पुष्टि की है।
बालकृष्ण का है कहना
हमारे पास कोई हैलीकाप्टर नहीं है। जिसकी बात हो रही है वह कंपनी का था। जो कुछ पूछना है कंपनी से पूछा जाना चाहिए। सड़क पर चल रहे बस के पास यदि परमिट नहीं है तो क्या यह यात्री की गलती है। उत्तराखंड सरकार किसी न किसी रूप में जो कुछ कर सकती है वह कर रही है।
-आचार्य बालकृष्ण, महामंत्री पतंजलि योगपीठ
फर्जी पासपोर्ट प्रकरण में भी चल रही जांच
अब तक प्रर्वतन निदेशालय का दिल्ली कार्यालय जांच कर रहा था। दून में निदेशालय का उप क्षेत्रीय कार्यालय खुलने के बाद संबंधित जांच यहां ट्रांसफर की गई है।
फर्जी पासपोर्ट प्रकरण की जांच दिल्ली में सहायक निदेशक सुशील कुमार कर रहे थे। इस वक्त उनकी तैनाती दून के उप क्षेत्रीय कार्यालय में हो गई है।
आचार्य बालकृष्ण के फर्जी पासपोर्ट प्रकरण के अलावा पेंगोलिन तस्करी केस और मनी लांड्रिंग के मामलों की जांच भी उप क्षेत्रीय कार्यालय करेगा।
मनी लांड्रिंग के मामले बढ़ने के बाद खोला कार्यालय
उत्तराखंड के मामलों की जांच अभी तक चंडीगढ़ स्थित निदेशालय का क्षेत्रीय कार्यालय करता था।
लेकिन प्रदेश में तस्करी और मनी लांड्रिंग के मामले बढ़ने के बाद यह कार्यालय खोला गया है।
उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि प्रदेश से संबंधित मामलों की जांच उप क्षेत्रीय कार्यालय दून से होने पर बारीकियों को पकड़ने में आसानी हो जाएगी।