फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   cancer and coma runs in suswa river dehradun.

उत्तराखंड की इस नदी के पानी में बह रहा है कैंसर और कोमा

Mon, 22 Feb 2016 01:34 PM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 22 Feb 2016 01:34 PM IST
विज्ञापन
cancer and coma runs in suswa river dehradun.

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से होकर गुजरने वाली सुसवा नदी का पानी किसी को भी कोमा में पहुंचा सकता है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से की गई सैंपलिंग में यह चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।

विज्ञापन


पानी में मैग्नीशियम, कैल्शियम से लेकर डिसॉल्व ऑक्सीजन की मात्रा दोगुनी से अधिक हो चुकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी मात्रा में प्रदूषण होने से इस पानी की जद में आने वाले व्यक्ति कोमा तक में जा सकते हैं।
विज्ञापन

 
दूधली निवासी अजय कुमार ने उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सूचना का अधिकार के तहत सुसवा नदी के पानी की गुणवत्ता की जानकारी मांगी थी। नियंत्रण बोर्ड ने 11 जनवरी 2016 को आई सुसवा नदी की प्रदूषण रिपोर्ट भेजी है। रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर हमने विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत सिंह से बात की।

विज्ञापन
विज्ञापन

पांच लाख से अधिक आबादी का सवाल

cancer and coma runs in suswa river dehradun.

रिपोर्ट : नदी में कैल्शियम की मात्रा 216 मिलिग्राम प्रति लीटर पाई गई।
विश्लेषण : बीआईएस 2012 स्टैंडर्ड के हिसाब से पानी में कैल्शियम की मात्रा 75 से 200 मिलिग्राम प्रति लीटर तक हो सकती है। इससे अधिक होने पर गॉल ब्लैडर, गुर्दे की पथरी हो सकती है। ज्यादा मात्रा में इस पानी के इस्तेमाल से बड़ी आंत का कैंसर, हाइपर टेंशन और स्ट्र्रोक और मोटापा हो सकता है।

रिपोर्ट : नदी में मैग्नीशियम की मात्रा 194 मिलिग्राम प्रति लीटर पाई गई।
विश्लेषण : बीआईएस 2012 स्टैंडर्ड के हिसाब से पानी में मैग्नीशियम की मात्रा 30 से 100 मिलिग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए। इससे अधिक मैग्नीशियम होने पर हार्टबीट असंतुलित होना, लॉ ब्लड प्रेशर से लेकर सांस की समस्या और कोमा में जाने जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।

रिपोर्ट : नदी के पानी में डिसॉल्व ऑक्सीजन की मात्रा 3.6 मिलिग्राम प्रति लीटर पाई गई।
विश्लेषण : इतनी अधिक मात्रा में डिसॉल्व ऑक्सीजन होने पर अगर इस पानी को जानवर पीएंगे तो बीमार हो जाएंगे। मछलियों के लिए भी पानी में जीवित रहना मुश्किल है।

रिपोर्ट : पानी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड(बीओडी) की मात्रा 36 मिलिग्राम प्रति लीटर पाई गई।
विश्लेषण : पानी में इतनी अधिक मात्रा में बीओडी होने पर एक झटके में बहुत सी मछलियां मर सकती हैं। इसके अलावा इस वजह से नदी के पानी का बहाव भी कम होता जाता है।

सुसवा नदी का पानी इतना खतरनाक है कि इसकी जद में आने पर पांच लाख से अधिक लोग प्रभावित हो सकते हैं। सुसवा नदी दून के लगभग बीचोंबीच पटेलनगर से होते हुए दूधली गांव से आगे जाकर सोंग नदी में मिलती है। आबादी क्षेत्र में देखें तो इस नदी की जद में पांच लाख से अधिक आबादी आती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed