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गैरजिम्मेदार गुरुजी पर लगाम कसेगा कॉल सेंटर

Wed, 22 Oct 2014 03:32 PM IST
बिशन सिंह बोहरा / अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोहरा / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 22 Oct 2014 03:32 PM IST
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call center for teacher and student attendance.

उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और विद्यार्थियों की हाजिरी जल्द ही मोबाइल फोन से लगने वाली है।

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निजी कॉल सेंटर का कर्मचारी गुरुजी से पूछेगा कि वह स्कूल में हैं या नहीं? इसी तरह छात्र-छात्राओं के बारे में अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन समिति से फोन करके उनकी मौजूदगी के बारे में पूछा जाएगा। इसके बाद इसकी रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय को भेजी जाएगी।

योजना लागू होने के बाद शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए स्कूल से बंक मारना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) से चलने वाली यह योजना लागू होने से पहले ही विवादित हो गई है।
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कहा जा रहा है कि जो सिस्टम यूपी में फेल हो चुका है वह यहां कैसे सफल हो सकता है? दरअसल, सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के गैरहाजिर रहने के मामले लगातार बढ़ने के बाद शिक्षा विभाग टीचरों और स्टूडेंट के अटेंडेंस की कॉल सेंटर बेस्ड मानीटरिंग की योजना शुरू करने जा रहा है।
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इसके जरिये न सिर्फ प्रदेश के 17 हजार स्कूलों के तीन लाख से अधिक छात्र-छात्राओं और 70 हजार शिक्षकों की प्रतिदिन की हाजिरी पर नजर रखी जाएगी, बल्कि मिड डे मील योजना में हो रही गड़बड़ियों पर भी लगाम लग सकेगी। पीपीपी सेल के कृष्णा रौतेला बताते हैं कि दो माह में योजना शुरू हो जाएगी।

रोज पांच फीसदी स्कूलों की जांच

call center for teacher and student attendance.

पीपीपी सेल के कृष्णा रौतेला बताते हैं कि प्रदेश के 17 हजार स्कूलों में से हर रोज पांच फीसदी स्कूलों की रेंडमली जांच होगी। सरकार योजना को खुद नहीं चला सकती। ऐसे में किसी काल सेंटर को योजना दी जाएगी।

इसके तहत शिक्षकों और अभिभावकों से मोबाइल से जानकारी ली जाएगी। प्रदेश के पांच फीसदी स्कूलों को हर रोज काल सेंटर से कॉल जाएगी, जिसमें शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन समिति से शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति का पता लगाकर रिपोर्ट को शिक्षा महानिदेशालय भेजा जाएगा।

शुरू होने से पहले ही विवाद
काल सेंटर बेस्ट उपस्थिति निगरानी योजना पर शुरू होने से पहले ही सवाल उठने लगे हैं। कुछ वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग ने इस योजना को शुरू किया था लेकिन करोड़ों खर्च करने के बाद यह सफल नहीं हो पाई।

उत्तराखंड में भी इस योजना पर हर साल एक करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। बताया जा रहा है कि योजना पर शिक्षा विभाग के ही कुछ अधिकारी और कर्मचारी असहमत हैं।

कॉल कैसे रोकेगी गैरहाजिरी?

call center for teacher and student attendance.
विभागीय सूत्रों की मानें तो योजना की बड़ी खामी इसका कॉल सेंटर से जुड़ना है। दरअसल, योजना के तहत किसी स्कूल के शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति की पुष्टि एक मोबाइल कॉल से की जानी है।

कॉल सेंटर की स्वचालित कॉल में अभिभावकों और शिक्षकों से ही हाजिरी की जानकारी ली जानी है। लेकिन, अभी अधिकारियों के कई बार औचक निरीक्षण के बावजूद उपस्थित न रहने वाले शिक्षक कॉल में सही जानकारी देंगे, यह बड़ा सवाल है।

प्रदेश के 2500 से अधिक स्कूलों में पानी, बिजली नहीं है। सरकार पहले स्कूलों में बुनियादी सुविधा की व्यवस्था करे। अफसर केवल सचिवालय में बैठकर योजनाएं बना रहे हैं, जबकि स्कूलों का बुरा हाल है।
- दिग्विजय चौहान, प्रांतीय महामंत्री, प्राथमिक शिक्षक संघ

शिक्षकों और छात्रों के बारे में सूचना के लिए योजना पर विचार चल रहा है। सिर्फ उपस्थिति नहीं, इससे जो जानकारी मिलेगी वह शासन के लिए प्लानिंग और मॉनीटरिंग में अहम होगी। जो भी जानकारी मिलेगी, उसका कुछ तो लाभ होगा ही। कुछ राज्यों ने इसे शुरू किया है।
- एमसी जोशी, शिक्षा सचिव
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