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CAG की रिपोर्ट ने खोली हरीश रावत सरकार की पोल, वित्तीय प्रबंधन को लेकर हुआ बड़ा खुलासा

Mon, 26 Mar 2018 10:55 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, भराड़ीसैंण
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, भराड़ीसैंण Updated Mon, 26 Mar 2018 10:55 PM IST
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CAG Report revealing financial disorder in uttarakhand ex governmnet
harish rawat

उत्तराखंड की पूर्व हरीश रावत सरकार को लेकर कैग ने एक खुलासा किया है। बड़े आकार का बजट बनाकर उसे वक्त पर खर्च न कर पाना सूबे की सरकारों की आदत रही है। लेकिन हरीश सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2016-17 के दौरान 31 मार्च तक 573.24 करोड़ की राशि खर्च हो जानी चाहिए थी। उसे वित्तीय वर्ष के ऐन आखिरी दिन सरेंडर कर दिया गया। प्रदेश सरकार के वित्तीय प्रबंधन की इस गंभीर खामी की पोल भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कैग) ने खोली है।

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सोमवार को विधानसभा के पटल पर पेश हुई यह रिपोर्ट हरीश राज के वित्तीय प्रबंधन की कमजोरियों को रेखांकित करती है। रिपोर्ट के अनुसार, 2016-17 यानी विधानसभा के चुनावी साल के दौरान तत्कालीन सरकार ने जो 1498.56 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट का प्रावधान किया वह गैर जरूरी साबित हुआ। सरकार ने 41930.08 करोड़ का बड़ा बजट बनाया जिसमें से सरकार 4684.19 करोड़ रुपये खर्च नहीं कर पाई।
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41 प्रकरणों में 1498.56 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट प्रावधान गैरजरूरी साबित हुआ। 109 मामलों में कुछ विभागों के बजट में अनुमान से अधिक 5457.33 करोड़ का प्रावधान कर दिया, लेकिन वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक इसे खर्च नहीं कर पाया। नतीजा यह हुआ कि उसे वित्तीय वर्ष अंतिम कार्य दिवस पर 573.24 करोड़ रुपये की राशि सरेंडर करनी पड़ी।

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कहां खर्च डाले 327.25 करोड़, नहीं दिया हिसाब

CAG Report revealing financial disorder in uttarakhand ex governmnet
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राज्य वित्त का एक अन्य कमजोर पक्ष यह भी उजागर हुआ कि 29 मामलों में 227.70 करोड़ रुपये की धनराशि आकस्मिकता निधि के तहत मंजूर तो करा ली गई लेकिन इनकी प्रतिपूर्ति कराना मुनासिब नहीं समझा गया। आडिट में यह तथ्य भी उजागर हुआ कि 2005-06 से लेकर 2015-16 के दौरान 15323.443 करोड़ की राशि का इस्तेमाल तो कर लिया गया लेकिन अभी तक राज्य विधानसभा से इसे नियमित कराया गया है। रिपोर्ट में यह कहा गया कि सरकार के 30 नियंत्रक अफसरों ने अपने खर्चों का कैग से मिलान नहीं किया।

कहां खर्च डाले 327.25 करोड़, नहीं दिया हिसाब
 प्रदेश के विभिन्न विभागों ने विभिन्न योजनाओं के 327.25 करोड़ रुपये खर्च डाले लेकिन अब तक इसका हिसाब नहीं दिया जा सका है। कैग रिपोर्ट  से यह तथ्य उजागर हुआ है। वित्तीय वर्ष 2016-17 की रिपोर्ट के मुताबिक विभागीय अधिकारियों ने मार्च 2017 में 224 उपयोगिता प्रमाण पत्र महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) को नहीं भेजे।

कायदे से उपयोगिता प्रमाण पत्रों को सत्यापन के बाद 12 माह के भीतर भेजा जाना चाहिए था। मार्च 2017 तक 490.04 करोड़ की धनराशि के 353 उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित थे। इनमें 303.25 करोड़ धनराशि के 211 उपयोगिता प्रमाण पत्र दो साल से लटके थे। दो वर्षों से ऊपर के 186.79 करोड़ धनराशि के 142 उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित थे। कैग ने विभागों, निकायों व प्राधिकरणों के इस कार्यप्रणाली में सुधार लाने की आवश्यकता जताई है।

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