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कैग रिपोर्ट लीक करने वाले की तलाश शुरू

Fri, 25 Apr 2014 10:18 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 25 Apr 2014 10:18 AM IST
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cag report leak

इंडियन काउंसिल फॉर फारेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन (आईसीएफआरई) से जुड़े संस्थानों में डेपुटेशन पर तैनात आईएफएस अधिकारी खौफ में हैं।

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अधिकारी कर चुके कई दौर की बैठकें
अमर उजाला में संस्थानों में अनियमितताओं से जुड़ी कैग रिपोर्ट के सिलसिलेवार खुलासों से उन पर दबाव बढ़ता जा रहा है। डैमेज कंट्रोल के लिए अधिकारी कई दौर की बैठकें कर चुके हैं।

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अब एक बार फिर बैठक कर आईएफएस ने रिपोर्ट लीक करने वाले की तलाश शुरू कर दी है। मार्च 2014 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक(सीएजी) ने आईसीएफआरई से जुड़े सभी संस्थानों में ऑडिट किया।
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ऑडिट रिपोर्ट में आईएफएस अफसरों की डेपुटेशन पर तैनाती में खेल समेत करोड़ों के बजट की बंदरबांट तक उजागर हुई है। अमर उजाला ने रिपोर्ट के विभिन्न पहलुओं पर सिलसिलेवार खुलासे किए।

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इससे आईएफएस अधिकारियों में हड़कंप है। सभी विभागों को अलर्ट किया गया है कि किसी भी तरह रिपोर्ट लीक करने वाले का पता लगाएं। वैज्ञानिकों, टेक्निकल और सपोर्टिंग स्टाफ को निशाने पर लेने की कोशिश जारी है।


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सूत्रों के मुताबिक बुधवार रात एफआरआई के वरिष्ठ आईएफएस अधिकारियों ने बैठक की। तय हुआ कि जल्द से जल्द रिपोर्ट लीक करने वाले व्यक्ति की तलाश की जाए, ताकि उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।

कब तक जमे रहेंगे आईएफएस

सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा है कि आईसीएफआरई व इससे जुड़े संस्थानों में डेपुटेशन पर आए हुए आईएफएस अधिकारी पांच साल की सीमा पार कर चुके हैं, लेकिन उन्हें मूल तैनाती पर वापस नहीं भेजा जा रहा।

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इससे हर साल करोड़ों रुपए के राजस्व की हानि संस्थान को हो रही है। सीएजी ने बताया था कि संस्थान में सुधांशु गुप्ता छह साल से, एएस रावत सात साल से, आरके आइमा छह साल से और वीआरआर सिंह सात साल से डेपुटेशन पर जमे हुए हैं।

मंत्रालय को रिपोर्ट की कापी भेजे जाने के बावजूद अब तक एक भी अधिकारी को नहीं हटाया गया है।

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