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संकट में इको सिस्टम की सेहत बताने वाली तितलियां

Mon, 28 Sep 2015 09:57 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 28 Sep 2015 09:57 AM IST
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butterfly Species in danger.

इको सिस्टम की सेहत बताने वाली ‘बायो इंडीकेटर’ तितलियों के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है।

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तितलियों को देखकर किसी भी क्षेत्र के इको सिस्टम की सेहत का विज्ञानी अंदाजा लगाते हैं। जूलोजिकल सर्वे आफ इंडिया के सर्वेक्षण में उजागर हुआ है कि एक दशक में 110 तितलियों की प्रजातियां लापता हो गईं।

अगर आंकड़ा निकाला जाए तो एक साल में 11 प्रजातियां लापता हुईं। यह सर्वेक्षण ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन केमद्देनजर तितलियों की डीएनए बार कोडिंग करने केलिए किया गया। जूलोजिकल सर्वे आफ इंडिया ने दुनिया में पहली बार हिमालयी क्षेत्र की दो तितलियों की बार कोडिंग भी की है।
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जलवायु परिवर्तन का इको सिस्टम पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव के कारण बायो इंडीकेटर तितलियों का नए सिरे से विश्व स्तर पर आंकड़ा तैयार किया जा रहा है। इसी क्रम में जूलोजिकल सर्वे आफ इंडिया ने भारत में पहली बार तितलियों का डीएनए बार कोडिंग डाटा बेस तैयार करने के लिए सर्वेक्षण शुरू किया।
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इसमें तितलियों का डीएनए लिया गया। डीएनए के आधार पर ही तितलियों की पहचान तैयार दी गई। विज्ञानियों का कहना है कि इससे विश्व में कहीं भी अगर किसी तितली की पहचान केसंबंध में कोई भ्रम होता है तो उसके डीएनए की जांच कर उसकी असलियत पता चल सकेगी।

देहरादून जिले से सर्वेक्षण वर्ष 2012 से शुरू किया था। इस वर्ष सर्वेक्षण का पहला चरण पूरा हुआ है। इसमें पाया गया कि एक दशक पहले भारतीय वन अनुसंधान संस्थान ने तितलियों की 200 प्रजातियों की जो चेक लिस्ट जारी की थी उनमें से 110 प्रजातियां अब उपलब्ध नहीं हैं।

जूलोजिकल सर्वे आफ इंडिया की वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. अंजुम रिजवी की अगुवाई में सर्वेक्षण टीम को तितलियों की सिर्फ 90 प्रजातियां ही मिली हैं। सबसे अधिक तितलियों की 60 प्रजातियां पहाड़ी की रानी मसूरी की गोद में मिली हैं। इसकेबाद सबसे अधिक प्रजातियां चकराता में मिलीं। इनमें शेड्यूल-2 की मेरापोरिया एगेथन और शेड्यूल-4 की यूपिलिया मल्सीबल आदि शामिल हैं।

ये है प्रमुख कारण
सबसे अधिक तितलियों की प्रजातियां तलहटी क्षेत्र से गायब हुईं। इन क्षेत्रों के वातावरण में नमी की मात्रा घट गई जिससे वनस्पतियों और तितलियों को नुकसान हुआ। तितलियों की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो गई।

दो तितलियों की पहली बार कोडिंग

जूलोजिकल सर्वे आफ इंडिया ने विश्व में पहली बार हिमालयी क्षेत्र की दो तितलियों डोडोना यूजींस और डोडोना दुर्गा की डीएनए बार कोडिंग की है। ये तितलियां उत्तराखंड और नेपाल में पाई जाती हैं।


जलवायु परिवर्तन की वजह से वनस्पतियां नष्ट हो रही हैं जिससे तितलियों को भी खतरा है। इनकी प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है। इन्हें बायो इंडीकेटर कहा जाता है। ये इको सिस्टम के बारे में बताती हैं। इनकी डीएनए बार कोडिंग की जा रही है।
- डॉ. अंजुम रिजवी, सीनियर विज्ञानी जूलोजिकल सर्वे आफ इंडिया

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