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वन भूमि पर कब्जा कर बना डाले व्यापारिक प्रतिष्ठान
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वन विभाग के अफसरों से बेखौफ कब्जेदारों दून-मसूरी मार्ग पर शिव मंदिर से लेकर दर्जनों जगहों पर वन विभाग की कीमती जमीन पर कब्जा करके अस्थायी व स्थायी निर्माण कर लिया। कई जगह तो व्यापारिक प्रतिष्ठान बना लिए हैं। प्रकरण प्रमुख वन संरक्षक जयराज के संज्ञान में लाए जाने के बाद उन्होंने मुख्य वन संरक्षक ग़ढ़वाल को एक सप्ताह के भीतर जांच करने व एक माह के भीतर कब्जों को हटाए जाने का आदेश दिया है।
प्रमुख वन संरक्षक जयराज का कहना है कि कब्जेदारों को चिन्हित करने के साथ ही उनकी बेदखली की कार्रवाई की जाए। चौंकाने वाली बात यह है कि शिव मंदिर से लेकर मसूरी तक कई जगह कब्जेदारों ने वन विभाग की जमीन पर कब्जा करके व्यापारिक प्रतिष्ठान तक बना डाले और वन विभाग के अफसरों व कर्मचारियोें को इसकी भनक तक नहीं लगी। ऐसे में इस प्रकरण में विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
प्रमुख वन संरक्षक जयराज वन विभाग की जमीन पर होने वाले कब्जों को लेकर लगातार मुख्य वन संरक्षकों, वन संरक्षकों व प्रभागीय वनाधिकारियों से सचेत कर रहे हैं लेकिन अधीनस्थ अधिकारियों ने इस दिशा मेें कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में वन विभाग की 9000 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जा है, जिसे खाली कराने को लेकर विभागीय अधिकारी नाकाम साबित हो रहे हैं। यह स्थिति तब है जबकि प्रमुख वन संरक्षक द्वारा इसकी लगातार मानीटरिंग की जा रही है।
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प्रमुख वन संरक्षक जयराज का कहना है कि कब्जेदारों को चिन्हित करने के साथ ही उनकी बेदखली की कार्रवाई की जाए। चौंकाने वाली बात यह है कि शिव मंदिर से लेकर मसूरी तक कई जगह कब्जेदारों ने वन विभाग की जमीन पर कब्जा करके व्यापारिक प्रतिष्ठान तक बना डाले और वन विभाग के अफसरों व कर्मचारियोें को इसकी भनक तक नहीं लगी। ऐसे में इस प्रकरण में विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
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प्रमुख वन संरक्षक जयराज वन विभाग की जमीन पर होने वाले कब्जों को लेकर लगातार मुख्य वन संरक्षकों, वन संरक्षकों व प्रभागीय वनाधिकारियों से सचेत कर रहे हैं लेकिन अधीनस्थ अधिकारियों ने इस दिशा मेें कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में वन विभाग की 9000 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जा है, जिसे खाली कराने को लेकर विभागीय अधिकारी नाकाम साबित हो रहे हैं। यह स्थिति तब है जबकि प्रमुख वन संरक्षक द्वारा इसकी लगातार मानीटरिंग की जा रही है।
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