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पुतला फूंका तो होगी तीन साल की जेल!

Tue, 08 Apr 2014 05:40 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 08 Apr 2014 05:40 PM IST
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burn to effigy is crime

छोटी-छोटी बात पर पुतला फूंकना मानो फैशन हो गया है। पुतला लिए चंद लोगों की टोली सड़क पर जाम लगा देती है और पुलिस चुपचाप तमाशा देखती रहती है। लेकिन, यदि पुलिस चाहे तो पुतला फूंकना बेहद मुश्किल काम हो सकता है।

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पुलिस ही नहीं जिस आदमी का पुतला फूंका गया वह भी इन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा सकता है।

पुतला दहन के खिलाफ है कानून
राजनीति के मैदान में एक-दूसरे पर हमला बोलना का यह सबसे आसान तरीका है। देहरादून में घंटाघर के आसपास पुतला दहन आम नजारा है। जबकि, ट्रैफिक के लिहाज से यह शहर का सबसे व्यस्त क्षेत्र है।
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आए दिन किसी न किसी पार्टी के कार्यकर्ता यहां विरोधी का पुतला लिए खड़े नजर आते हैं। जब तक पुतला जलकर राख नहीं हो जाता तब तक आम लोगों को मुसीबत झेलनी पड़ती है। लेकिन, 1930 में बना एक कानून इस्तेमाल किया जाए तो पुतला फूंकना दुश्वार हो सकता है।
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पुलिस भी है कानून से अनजान
हालांकि, आम लोग ही नहीं पुलिस भी इस कानून से अब तक अंजान है। यही वजह है कि दून में इस तरह के मुकदमे दर्ज नहीं किए जाते हैं।

हाल में ही कोतवाली निरीक्षक एसएस विष्ट ने रोजमर्रा के पुतला दहन के मद्देनजर बरसों पुराने कानून की याद अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को दिलाई है।

एक से तीन साल की सजा
ब्रिटिश शासने काल के दौरान 1930 में बनाए गए स्पेशल पावर एक्ट की धारा पांच में पुतला फूंकने का अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

हालांकि यह इसे जमानती धारा के दायरे में रखा गया है, लेकिन ऐसे मामलों में एक से लेकर तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।

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