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Uttarakhand News: ऐसे कैसे खिलेंगे फूल और कैसे मनेगी फूलदेई....संकट में हैं हिमालयी क्षेत्र के भौरे

Tue, 16 Apr 2024 09:44 AM IST
रेनू सकलानी बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो , देहरादून
बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो , देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Tue, 16 Apr 2024 09:44 AM IST
सार

वर्ष 2050 से 2070 तक भौरे अपने प्राकृतिक वास का बड़ा हिस्सा खो देंगे। जिनके मात्र 15 प्रतिशत आवास सुरक्षित रहेंगे। हिमालय क्षेत्र में भौरों की 32 प्रजातियों पर अध्ययन किया गया है।

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Bumblebees of Himalayan region are in trouble Uttarakhand News in hindi
हिमालय क्षेत्र में संकट में भौंरे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जलवायु परिवर्तन और हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती मानव गतिविधियों की वजह से आने वाले समय में भौरों के प्राकृतिक आवास धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे। भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने हिमालयी क्षेत्रों में भौरों की 32 प्रजातियों के अध्ययन में इसका खुलासा किया है।

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अध्ययन रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने इनके भविष्य के खतरों को लेकर चेताया है। कहा, वर्ष 2050 से 2070 तक भौरे अपने प्राकृतिक वास का बड़ा हिस्सा खो देंगे। जिनके मात्र 15 प्रतिशत आवास सुरक्षित रहेंगे। भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने अध्ययन रिपोर्ट में भौरों के प्राकृतिक वास प्रभावित होने की बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन के साथ ही शहरीकरण, बढ़ती कृषि गतिविधियों, कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग एवं भूमि उपयोग में परिवर्तन को बताया है।

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वैज्ञानिकों के मुताबिक, इससे अगले 50 वर्षों में भौरों की अधिकतर प्रजातियों के लिए उपयुक्त आवास में कमी आएगी। अध्ययन के दौरान पाया कि हिमालयी क्षेत्र का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भौरों की केवल तीन प्रजातियों के लिए उपयुक्त है। 20 से 30 प्रतिशत क्षेत्र भौरों की केवल दो प्रजातियों एवं 10 प्रतिशत से कम क्षेत्र 16 प्रजातियों के लिए उपयुक्त हैं।

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Bumblebees of Himalayan region are in trouble Uttarakhand News in hindi
हिमालय क्षेत्र में संकट में भौंरे - फोटो : अमर उजाला

2050 तक बहुत तेजी से घट जाएगा भौरा प्रजातियों का निवास स्थान
रिपोर्ट में कहा गया कि भौरा प्रजातियों का वर्तमान उपयुक्त निवास स्थान 2050 तक बहुत तेजी से घट जाएगा। 15 प्रजातियां अपने वर्तमान उपयुक्त आवास का 90 प्रतिशत से अधिक खो देंगी, जबकि 10 प्रतिशत प्रजातियां अपने वर्तमान उपयुक्त आवास का 50 से 90 प्रतिशत खो देंगी।

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भौंरे - फोटो : अमर उजाला

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से अध्ययन

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से भारतीय वन्यजीव संस्थान के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. वीपी उनियाल के निर्देशन में भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने वर्ष 2021 से 2023 तक हिमालयी क्षेत्र के भौरों की 32 प्रजातियों पर अध्ययन किया। अध्ययन से यह पता चला है कि भौरों का आवास संकटग्रस्त श्रेणी में आ चुका है।

यही हाल रहा तो आने वाले समय में भौरों के आवास धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे और हिमालयी क्षेत्र में होने वाले सुंदर फूलों में परागण की प्रक्रिया न होने से फूल नहीं खिल पाएंगे। -डाॅ. वीपी उनियाल, पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक भारतीय वन्यजीव संस्थान

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