विस सत्र: फीका-फीका रहा राज्यपाल का अभिभाषण
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उत्तराखंड विधानसबा के बजट सत्र के पहले दिन सदन में राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल के अभिभाषण में पर्वतीय क्षेत्र के विकास, पुनर्वास, पलायन से जुड़े मुद्दे गायब रहे। शिक्षा और अवस्थापना विकास को भी तवज्जो नहीं दी गई। पूर्व सैनिकों का एक लाइन में ही जिक्र किया गया।
नीति आयोग का गठन होने और केंद्र के स्तर पर योजनाओं का पूरा ढर्रा बदल देने के बाद भी राज्यपाल के अभिभाषण में एक भी शब्द नहीं बोला गया। अलबत्ता, सरकार की उपलब्धियों का खूब बखान किया गया।
राज्यपाल ने अभिभाषण की शुरुआत आपदा राहत के लिए किए गए कार्य से तो की पर आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने की कोई कारगर योजना सामने नहीं रखी। 55 मिनट के अभिभाषण में राज्यपाल ने संसाधन के बेहतर इस्तेमाल से लेकर आय बढ़ाने तक पर कोई बात नहीं की।
हालांकि चालू योजनाओं में गैप फिलिंग का इरादा जताया गया। वहीं जनजातियों, अनुसूचित जनजातियों और अल्पसंख्यकों के लिए कई योजनाओं और उपलब्धियों का जिक्र किया गया। कुपोषण को कम करने, यात्रा मार्गों पर हर पचास किलोमीटर पर ट्रामा सेंटर स्थापित करने, चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने का इरादा जताया गया पर स्वास्थ्य में आधारभूत ढांचे का विकास, चिकित्सा सुविधाओं का विकास आदि को नजरअंदाज कर दिया गया।
पलायन, पुनर्वास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे रहे अछूते
आपदा, जलवायु परिवर्तन को तवज्जो दी गई पर इनके प्रभाव कम करने के लिए योजनाओं का कोई जिक्र नहीं किया गया। यहां तक की पुनर्वास जैसा महत्वपूर्ण मुद्दा भी अछूता ही रह गया।
अभिभाषण में ई-गवर्नेंस की बात की गई पर प्रदेश की ई-गवर्नेंस की योजनाओं में आए ठहराव को दूर करने की बात नहीं की गई। पिछले कुछ दिनों से विवाद का कारण बनी आबकारी नीति को भी अभिभाषण में कारगर बताया गया।
अभिभाषण में संस्कृत शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा की उपलब्धियों को सामने रखा गया पर उच्च शिक्षा को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। अवैध खनन को रोकने, यातायात को सुचारु करने के लिए सिटी पेट्रोल का गठन, हरिद्वार के भगवानपुर आईआईई में स्मार्ट सिटी पायलट परियोजना का जिक्र हुआ। बजट में सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योग नीति के जरिए उद्योगों पर फोकस किया गया पर उद्योगों के लिए कोई ठोस रोडमैप सामने नहीं रखा गया।
रोजगार और कौशल उन्नयन को उद्योगों के जरिए सिर्फ छुआ गया। खेती की समस्याओं को बजट अभिभाषण में बिल्कुल ही छोड़ दिया गया। प्रदेश सरकार की ओर से गठित भेड़ बकरी पालन, ग्रामीण सड़के और ड्रेेनेज, तालाब आदि नए विभागों की उपलब्धियों को तक बजट अभिभाषण में जगह नहीं दी गई।