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बजट 2020 : टैक्स विवादों का निपटारा हुआ आसान, लेकिन आयकर जमा कराने के दो विकल्पों से होगा असमंजस

Sat, 01 Feb 2020 10:28 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 01 Feb 2020 10:28 PM IST
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Budget 2020: there will be confusion with two options to deposit income tax
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एएनआई

आम बजट को लेकर विशेषज्ञों की मिली-जुली राय है। द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आईसीएआई) देहरादून चैप्टर के अध्यक्ष सीए रजत शर्मा ने बजट को आम जनता के लिहाज से मिला-जुला बताया।

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उन्होंने कहा, 40 हजार रुपये तक वेतन वालों को जहां कोई टैक्स नहीं देना होगा तो दूसरी ओर आयकर जमा कराने के दो विकल्पों से असमंजस बढ़ेगा। उनके बताए हुए कुछ मुख्य बिंदुओं को इस तरह समझ सकते हैं।
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- जिनका वेतन सालाना पांच लाख रुपये तक है, उनके लिए बजट बढ़िया है। उन्हें कोई टैक्स जमा नहीं करना होगा।
- पांच लाख से ऊपर वेतन वालों के लिए टैक्स जमा कराने का नया विकल्प भी नए स्लैब के तौर पर दिए गए हैं। इसका असर यह होगा कि आम आदमी यह कैलकुलेशन करने में लग जाएगा कि वह पुरानी व्यवस्था से टैक्स जमा कराए या नई व्यवस्था से।

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ये बिंदु भी बेहद जरूरी

- नई व्यवस्था से टैक्स जमा कराने पर किराए की रसीद, एलआईसी, हेल्थ इंश्योरेंस, एफडी, म्यूचुअल फंड जैसी छूट नहीं मिलेगी, जिससे लोगों का निवेश की बजाये खर्च करने पर फोकस बढ़ेगा। जो कि उनके परिवार के लिए भी कहीं न कहीं नुकसानदायक होगा।
- पैन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया आसान करने से निश्चित तौर पर लोगों को राहत मिलेगी।
- सरकार आयकर से जुडे़ विवादों को निपटारे के लिए नई योजना लेकर आई है। उत्तराखंड में भी हजारों की संख्या में आयकर के वाद चल रहे हैं। 31 मार्च तक इस स्कीम में शामिल होने पर उन्हें केवल टैक्स देना होगा। पेनल्टी या ब्याज से छूट मिलना राहत की बात है। आयकर वादों में फंसे हुए टैक्सपेयर के लिए यह अच्छी खबर है।

बजट पर कर्मचारियों की प्रतिक्रिया 

केंद्रीय बजट में आयकर छूट की घोषणा से प्रदेश के कर्मचारियों की खट्टी मीठी प्रतिक्रिया सामने आई है। किसी ने कहा कि टैक्स में दी गई छूट से राहत मिली है तो कोई कर्मचारी बोला कि मध्य वर्ग से छला गया है। अमर उजाला ने आयकर छूट की घोषणा पर कर्मचारियों से बातचीत की। पढ़िए किस कर्मचारी ने क्या कहा:- 


केंद्रीय बजट में आयकर कटौती के जो स्लैब और व्यवस्था बनाई गई है, वो कर्मचारियों और मध्यवर्ग की अपेक्षा के विपरीत है। इस बार सबको को यह उम्मीद थी कि आयकर की कटौती से कम से कम 10 लाख सालाना आय को कर मुक्त किया जाएगा। सरकार ने नई व्यवस्था तो दी, लेकिन पूर्व में मिल रही सुविधाओं को हटा दिया। इससे लाभ होने के स्थान पर हानि होती दिखाई पड़ रही है। इस प्रस्ताव से कर्मचारियों में घोर निराशा है और वे ये महसूस कर रहे हैं कि कहीं उनसे छल तो नहीं हो गया।
- अरुण पांडेय, प्रदेश कार्यकारी महामंत्री, उत्तराखंड संयुक्त कर्मचारी परिषद

बजट में सालाना पांच लाख तक की आय को पूरी तरह से करमुक्त करने की घोषणा स्वागत योग्य है। ढाई लाख से पांच लाख रुपये तक मध्य वर्ग 12500 रुपये की छूट प्रदान की गई है। पांच लाख से 7.50 लाख रुपये और 10 लाख तक के स्लैब में अब कुल 38000 रुपये तक छूट दी गई है। इससे कुछ राहत मिलती दिख रही है। लेकिन सरकार ने सेविंग से आयकर में मिलने छूट को हटा दिया है। इस पर केंद्र सरकार पुनर्विचार करे। गंभीर बीमारी में मेडिकल रि-ईम्बर्समेंट जैसे मामले को भी आयकर में छूट के दायरे में लाया जाना चाहिए था।
- राकेश जोशी, महासचिव, उत्तराखंड सचिवालय संघ

इनकी भी सुने

पांच लाख तक सालाना इनकम वालों को पूरी तरह से आयकर मुक्त करना कर्मचारी तबके लिए एक बड़ी राहत है। इससे तकरीबन सभी समूह घ और समूह ग के हजारों कर्मचारियों को फायदा होगा। पांच से साढ़े सात लाख तक आयकर की नई सीमा में भी पांच प्रतिशत की छूट दी गई है। इससे राहत मिलेगी, लेकिन सरकार को सेविंग से मिलने वाली छूट के विकल्प को जारी रखना चाहिए।
- पंचम सिंह बिष्ट, संयोजक अधिकारी कर्मचारी समन्वय मंच

हम अपेक्षा कर रहे थे कि 10 लाख सालाना आय को आयकर से मुक्त कर दिया जाएगा। बढ़ती महंगाई में मध्य वर्ग और कर्मचारी तबके के लिए ये बड़ी राहत होती। पांच लाख रुपये तक सालाना आय वालों को ही आयकर से बाहर रखा गया है। इससे कर्मचारी का एक छोटा वर्ग को ही राहत मिली है। बचत के प्रावधान को हटाकर सरकार ने एक हाथ से ले और दूसरे हाथ दे वाली कहावत को चरितार्थ किया है।
- एसएस चौहान, प्रदेश महामंत्री, उत्तराखंड लोनिवि डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ

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