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Dehradun News: बेरहमी से हत्या को फिल्माया और पीड़ित का उड़ाते रहे मजाक
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Iइसलिए अदालत ने दुर्लभतम से दुर्लभ मामला करार दिया
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Iसाबिर ने अन्य हत्यारों को दो लाख रुपये की दी थी सुपारी
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Iहत्यारों ने ई-रिक्शा चालक की हत्या करते समय मोबाइल से वीडियो बनाया था जिसमें वह पीड़ित के साथ गाली-गलौज करते हुए उसका मजाक उड़ा रहे थे।
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Iमेडिकल रिपोर्ट बताती है कि वहशियाना हमले के चलते मृतक की खोपड़ी की हड्डियां टूट गई थीं। उसके चेहरे की हड्डियां तक कुचल गई थीं। उसके दिमाग की झिल्ली फट गई थी। इन वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर एडीजे प्रथम की अदालत ने मामले को दुर्लभतम से दुर्लभ करार दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि हत्या को फिल्माने के साथ क्रूरता के साथ अंजाम दिया जो समाज की सामूहिक चेतना को झकझोरता है। इसलिए न्याय के लिए मौत की सजा ही एकमात्र उचित विकल्प है। अदालत ने माना कि यह सुनियोजित हत्या का मामला था।
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Iअभियोजन के अनुसार, साबिर अली ने हत्या की साजिश रची क्योंकि वह ई-रिक्शा चालक की पत्नी के साथ अवैध संबंध में था। उसने हत्या के लिए रईस खान को दो लाख रुपये की सुपारी दी थी। रईस ने अरशद, शाहरुख और रवि कश्यप को इस जघन्य अपराध में शामिल किया। ई-रिक्शा चालक को दोस्ती का झांसा देकर साथ लेकर गए फिर उसके सिर पर पत्थरों से क्रूरता पूर्वक हमला किया।
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Iअदालत ने इन प्रमुख आधानों पर सुनाया मौत का फैसला
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I1. अदालत ने पुलिस जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर संतुष्टि जताई।
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I2. अदालत ने कहा, यह उकसावे में हुआ जुर्म नहीं बल्कि पूर्व नियोजित साजिश रची गई।
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I3. टिप्पणी की कि यह मामला समाज की सामूहिक चेतना को हिला देने वाला था। हत्या को फिल्माना और उस पर गर्व महसूस करना, पीड़ित का मजाक उड़ाना और क्रूरता दिखाना, एक विकृत मानसिकता को दर्शाता है। ऐसे अपराध में आजीवन कारावास की सजा अपर्याप्त होगी।
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Iबचाव पक्ष की नरमी बरतने की मांग खारिज
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Iसजा में नरमी बरतने के लिए बचाव पक्ष ने दलील दी कि दोषियों की उम्र 30 साल से कम है। उनका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। यह उनका पहली बार किया अपराध है। मामला केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है इसलिए फांसी अनुचित है। अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।
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Iमुआवजे के एक लाख नहीं दिए तो संपत्ति से वसूले जाएंगे
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Iअदालत ने साबिर अली और रईस खान को मृतक के बच्चों के लिए एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है जो तीन माह के भीतर नहीं दिया गया तो दोषियों की संपत्ति से वसूले जाने का आदेश है। सभी दोषी 30 दिन के भीतर उच्च न्यायालय नैनीताल में अपील दायर कर सकते हैं। मौत की सजा को उच्च न्यायालय की पुष्टि के बाद ही फांसी दी जाएगी। तब तक दोषियों को देहरादून की जिला जेल में रखा जाएगा।I
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Iसाबिर ने अन्य हत्यारों को दो लाख रुपये की दी थी सुपारी
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Iहत्यारों ने ई-रिक्शा चालक की हत्या करते समय मोबाइल से वीडियो बनाया था जिसमें वह पीड़ित के साथ गाली-गलौज करते हुए उसका मजाक उड़ा रहे थे।
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Iमेडिकल रिपोर्ट बताती है कि वहशियाना हमले के चलते मृतक की खोपड़ी की हड्डियां टूट गई थीं। उसके चेहरे की हड्डियां तक कुचल गई थीं। उसके दिमाग की झिल्ली फट गई थी। इन वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर एडीजे प्रथम की अदालत ने मामले को दुर्लभतम से दुर्लभ करार दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि हत्या को फिल्माने के साथ क्रूरता के साथ अंजाम दिया जो समाज की सामूहिक चेतना को झकझोरता है। इसलिए न्याय के लिए मौत की सजा ही एकमात्र उचित विकल्प है। अदालत ने माना कि यह सुनियोजित हत्या का मामला था।
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Iअभियोजन के अनुसार, साबिर अली ने हत्या की साजिश रची क्योंकि वह ई-रिक्शा चालक की पत्नी के साथ अवैध संबंध में था। उसने हत्या के लिए रईस खान को दो लाख रुपये की सुपारी दी थी। रईस ने अरशद, शाहरुख और रवि कश्यप को इस जघन्य अपराध में शामिल किया। ई-रिक्शा चालक को दोस्ती का झांसा देकर साथ लेकर गए फिर उसके सिर पर पत्थरों से क्रूरता पूर्वक हमला किया।
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Iअदालत ने इन प्रमुख आधानों पर सुनाया मौत का फैसला
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I1. अदालत ने पुलिस जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर संतुष्टि जताई।
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I2. अदालत ने कहा, यह उकसावे में हुआ जुर्म नहीं बल्कि पूर्व नियोजित साजिश रची गई।
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I3. टिप्पणी की कि यह मामला समाज की सामूहिक चेतना को हिला देने वाला था। हत्या को फिल्माना और उस पर गर्व महसूस करना, पीड़ित का मजाक उड़ाना और क्रूरता दिखाना, एक विकृत मानसिकता को दर्शाता है। ऐसे अपराध में आजीवन कारावास की सजा अपर्याप्त होगी।
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Iबचाव पक्ष की नरमी बरतने की मांग खारिज
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Iसजा में नरमी बरतने के लिए बचाव पक्ष ने दलील दी कि दोषियों की उम्र 30 साल से कम है। उनका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। यह उनका पहली बार किया अपराध है। मामला केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है इसलिए फांसी अनुचित है। अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।
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Iमुआवजे के एक लाख नहीं दिए तो संपत्ति से वसूले जाएंगे
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Iअदालत ने साबिर अली और रईस खान को मृतक के बच्चों के लिए एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है जो तीन माह के भीतर नहीं दिया गया तो दोषियों की संपत्ति से वसूले जाने का आदेश है। सभी दोषी 30 दिन के भीतर उच्च न्यायालय नैनीताल में अपील दायर कर सकते हैं। मौत की सजा को उच्च न्यायालय की पुष्टि के बाद ही फांसी दी जाएगी। तब तक दोषियों को देहरादून की जिला जेल में रखा जाएगा।I