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भारत का ऐसा हिस्सा जहां आज भी चलता है अंग्रेजी 'राज'

Wed, 03 Jun 2015 01:44 PM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 03 Jun 2015 01:44 PM IST
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british rule on cantonment land in dehradun.

67 साल पहले द्वितीय विश्व युद्ध के समय ब्रिटिश सेना ने देहरादून सैन्य छावनी के इर्दगिर्द की निजी भूमि पर भवन निर्माण से संबंधित जो प्रतिबंध लगाए थे, उनसे सैकड़ों परिवारों को आज भी आजादी नहीं मिल पाई है। इस प्रतिबंध की वजह से लोग जमीन का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

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देहरादून के क्लेमेंटटाउन कैंट से गढ़ी कैंट के प्रेमनगर क्षेत्र के बीच पांच सौ एकड़ में फैली निजी भूमि 1942 में तत्कालीन पूर्व सैन्य कमान के जीओसी इन सी (जनरल आफिसर कमांडिंग इन चीफ ) के आदेश पर आज भी प्रतिबंधित है।
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जिसने वहां आदेशों का उल्लंघन कर भवन बना लिया वह छावनी परिषदों के अनुसार अवैध हैं। उसे पानी, सड़क, नाली तक की सहूलियत को तरसना पड़ रहा है।

ब्रिटिश सेना से अब भारतीय सेना हो गई, लेकिन इन परिवारों की सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। कई बार सेना से यह परिवार प्रतिबंध हटाने की दुहाई दे चुके हैं, लेकिन सेना सुरक्षा का हवाला देकर प्रतिबंध हटाने को तैयार नहीं है।

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यूरोप के युद्धबंदी रखे थे यहां

british rule on cantonment land in dehradun.

द्वितीय विश्वयुद्ध में यूरोप के युद्धबंदियों को ब्रिटिश सेना ने देहरादून छावनी में रखा था। इन यद्धबंदियों को स्थानीय लोगों से कोई बीमारी नहीं हो जाए इसके लिए कैंट एक्ट 1924 के तहत पूर्वी कमान ने विश्व युद्ध शुरू होने के बाद क्षेत्र को निर्माण के लिए प्रतिबंधित कर दिया।

सेना ने 2010 में हटाने के किया इंकार
निजी भूमि पर निर्माण प्रतिबंध को हटाने की मांग को कई बार उठाया गया, लेकिन जीओसी इन सी मध्य कमान ने उसे खारिज कर दिया। सेना ने वर्ष 2010 में प्रतिबंध को सुरक्षा कारणों से जारी 1942 का आदेश रखने का पत्र जारी किया है।

यह क्षेत्र हैं शामिल

प्रतिबंधित क्षेत्र में 300 एकड़ भूमि गढ़ी कैंट के प्रेमनगर क्षेत्र की है। इसमें केरी गांव, रागनवाला, मोहनपुर, स्मिथनगर का क्षेत्र शामिल हैं। दूसरे कैंट क्लेमेंटटाउन के  छोटा भारूवाला, ओसले लाइन, लालढांग, मोथोरोवाला, दौड़वाला, डकोटा और इंद्रापुरी फार्म का कुछ हिस्सा शामिल है। यहां अधिकांश भूमि मालिकों के मकान अवैध हैं।

सेना बढ़ा रही अवैध निर्माण का धंधा

british rule on cantonment land in dehradun.

सेना ने क्षेत्र को प्रतिबंधित कर रखा है, लेकिन उसपर हो रहे अवैध निर्माण पर आंखें मूंदे बैठी है। छावनी परिषद न तो यहां भवन मानचित्र पास करता है न ही पेयजल, स्ट्रीट लाइट, सड़क और सेनिटेशन की सुविधा दे सकता है। ऐसे में भूमि मालिक से जमीन खरीद कर बिल्डर बिना नक्शा पास करवाए बड़े काम्पलैक्स, प्लाट और फ्लैट बनाए जा रहे हैं।

सेना ने वर्ष 1942 से छावनी के अधीन आने वाले निजी भूमि क्षेत्र को निर्माण के लिए प्रतिबंधित किया है। वहां परिषद भवन निर्माण मानचित्र पास नहीं कर सकती। निजी भूमि होने के चलते जो निर्माण हुए हैं उन्हें अवैध निर्माण के नोटिस दिए हैं।
विभा शर्मा, मुख्य अधिशासी अधिकारी

क्लेमेंटटाउन कैंट बोर्ड के माध्यम से 2008 से 2013 के बीच प्रतिबंधित हटाने के लिए तीन बार प्रस्ताव मध्य कमान को भेजा गया, जिसे सेना अस्वीकार कर दिया। अब इस मामले में रक्षा मंत्री को अखिल भारतीय छावनी परिषद निर्वाचित सदस्य महासंघ मांगपत्र सौंपेगा। स्थानीय भूमि मालिकों के लिए सबसे बड़ी समस्या है, जबकि बिल्डर धड़ल्ले से प्लाटिंग करवा रहे हैं।
- भूपेंद्र कंडारी, राष्ट्रीय महासचिव

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