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अब हटेगी छावनी क्षेत्रों अंग्रेजों की लगाई रोक
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 05 Oct 2015 11:44 AM IST
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द्वितीय विश्व युद्ध के समय से ब्रिटिश सेना द्वारा देहरादून सैन्य छावनी के इर्दगिर्द की निजी भूमि पर भवन निर्माण पर लगाया गया प्रतिबंध अब हट सकता है।
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अमर उजाला ने प्रतिबंध के खिलाफ अभियान चलाया था, जिसके बाद मामला रक्षा मंत्रालय तक पहुंचा। मंत्रालय के निर्देश पर प्रतिबंध हटाने के लिए जनरल आफिसर कमांडिंग इन चीफ (जीओसी इन सी) लखनऊ सैन्य कमान को कैंट बोर्ड नए सिरे से प्रस्ताव भेजेंगे। इसी संबंध में सोमवार को क्लेमेंटटाउन कैंट बोर्ड की विशेष बैठक आमंत्रित की गई है।
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क्लेमेंटटाउन कैंट से गढ़ी कैंट के प्रेमनगर क्षेत्र के बीच पांच सौ एकड़ में फैली निजी भूमि साल 1942 में तत्कालीन पूर्वी सैन्य कमान के जीओसी इन सी के आदेश पर प्रतिबंधित है। वर्ष 1968, 1972 और 1974 को कुछ क्षेत्रों से प्रतिबंध हटा था, लेकिन अधिकतर हिस्सों पर निजी भूमि मालिक भवन नहीं बना सकते हैं।
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आदेशों का उल्लंघन कर कई भवन बने हैं, लेकिन वह छावनी परिषदों के राजस्व रिकार्ड में अवैध कार्रवाई की जद में हैं। इन भवनों के लिए पेयजल कनेक्शन, सड़क, नाली तक की सहूलियत स्थानीय निकाय मुहैया नहीं करवा रहे हैं।
अखिल भारतीय छावनी परिषद निर्वाचित सदस्य महासंघ के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र कंडारी ने बताया कि क्लेमेंटटाउन कैंट बोर्ड के माध्यम से साल 2008 से साल 2013 के बीच प्रतिबंधित हटाने के लिए मध्य कमान को भेजे गए प्रस्ताव को सेना ने अस्वीकार कर दिए। अब मामले में रक्षा मंत्री मनोहर परिकर को महासंघ ने मांगपत्र सौंपा था, जिसके बाद मंत्रालय ने बोर्ड को नए सिरे से प्रस्ताव भेजने के लिए निर्देशत किया है।
सेना ने 2010 में हटाने से किया इनकार
निजी भूमि पर निर्माण प्रतिबंध को हटाने की मांग कई की गई, लेकिन जीओसी इन सी मध्य कमान ने उसे खारिज कर दिया। सेना ने वर्ष 2010 में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए साल 1942 का आदेश फिर जारी कर दिया।
इसलिए लगाया था प्रतिबंध
द्वितीय विश्वयुद्ध में यूरोप के युद्धबंदियों को ब्रिटिश सेना ने देहरादून छावनी में रखा था। इन युद्धबंदियों को स्थानीय लोगों से कोई बीमारी ना हो जाए इसके लिए कैंट एक्ट 1924 के तहत पूर्वी कमान ने विश्व युद्ध शुरू होने के बाद क्षेत्र को निर्माण के लिए प्रतिबंधित कर दिया था।