{"_id":"42de6855f086f35fd418ba9b6353ebbf","slug":"bribes-in-the-transfer-process","type":"story","status":"publish","title_hn":"तबादला प्रक्रिया में चल रहा रिश्वत का खेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तबादला प्रक्रिया में चल रहा रिश्वत का खेल
अमर उजाला, देहरादून/हल्द्वानी
Updated Sat, 21 Sep 2013 02:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया में चल रहे खेल की सच्चाई पर हल्द्वानी में विजिलेंस की कार्रवाई ने मुहर लगा दी।
विज्ञापन
विजिलेंस ने बीईओ हल्द्वानी के कार्यालय में नियुक्त ब्लॉक रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) समन्वयक भगवान सिंह बोरा और लिपिक नीरज आर्या को 25-25 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। दोनों ने एक विद्यालय का कोटिकरण (सुगम-दुर्गम की ग्रेडिंग) सही करने के लिए शिक्षिका से पैसे मांगे थे।
हालांकि, दोनों का कहना है कि शिक्षिका ने तबादले के लिए दबाव बनाया था। ऐसा न होने पर फंसा दिया गया। उधर, प्रदेश में ऐसे दर्जनों मामले हैं जिनमें चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए स्कूलों का वर्गीकरण मनमाने तरीके से बदल दिया गया। शिक्षक संगठनों को दिया शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी का वर्गीकरण ठीक करने का भरोसा भी हवाई साबित हुआ।
विज्ञापन
पढ़ें, ग्राफिक एरा हॉस्टल में छात्र के साथ ये क्या हुआ?
विज्ञापन
सूत्र तो यह भी कहते हैं कि ऊंची सिफारिशों और जमकर ‘लेन-देन’ के बीच आनन फानन में शिक्षकों के तबादले मध्य सत्र में किए गए।
चंपावत जिले के जीआईसी अमेड़ी को प्रधानाचार्य ने 34 अंक दिए। खंड शिक्षा अधिकारी ने तीन अंक बढ़ाकर इसे 37 कर दिया, जबकि इंटरनेट पर डाली गई सूची में स्कूल के आगे 41 लिखा था। इस तरह यह स्कूल दुर्गम श्रेणी का होने के बावजूद सुगम में आ गया।
ऊधमसिंह नगर जिले के जीआईसी फौजी मदकोटा स्कूल को प्रधानाचार्य ने कोटिकरण प्रक्रिया के दौरान 34 अंक दिए। इस आधार पर इस स्कूल को दुर्गम श्रेणी में दर्ज किया जाना था। लेकिन, खंड शिक्षा अधिकारी ने सीधे बीस अंक बढ़ा दिए। इससे यह सुगम हो गया।
पढ़ें, आरटीआई से पता चला एमडीडीए का सच
देहरादून जिले के विकासनगर ब्लाक का जीआईसी सोरना डोबरी इंटरनेट पर डाली गई सूची में 43 अंकों के साथ सुगम श्रेणी में है। खास बात यह है कि खंड शिक्षा अधिकारी ने स्कूल को 34 अंक दिए थे, जबकि प्रधानाचार्य ने महज 29। यह स्कूल दुर्गम था।
देहरादून के ही रायपुर ब्लाक के जीआईसी मालदेवता को भी कुछ अफसरों ने दुर्गम से सुगम बना दिया। स्कूल प्रधानाचार्य ने 40 अंक दिए थे, जिसे बीईओ ने 54 किया। इंटरनेट पर डाली गई सूची में स्कूल को 58 अंक दिए गए हैं।
यह है अंकों का खेल
स्कूलों को सुविधाओं के विभिन्न मानकों के आधार पर अंक दिए गए हैं। 41 से 53 अंक वाले स्कूलों को सुगम (सी) श्रेणी में रखा गया है। 28 से 40 अंक वाले स्कूलों को दुर्गम यानी डी श्रेणी दी गई है।
..तो क्यों सोया रहा विभाग
विजिलेंस कार्रवाई में साफ हो गया है कि कई स्कूलों के अंक संशोधित किए गए। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि अगर
स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने अंक ठीक नहीं दिए या जांच के बाद बीईओ के स्तर पर गलत अंक दिए गए तो विभाग क्यों सोया रहा। अंकों से छेड़छाड़ करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
इन स्कूलों में भी बदले अंक
स्कूल नाम---------प्रिंसिपल के अंक------बीईओ के अंक
राउमावि फूगर-----45-----------32
राउमावि चल्थी----39-----------36
जीआईसी द्यूरी-----27-----------20
जीआईसी धौन-----41-----------36
राउमावि पाली------09----------11
(नोट: ये सभी स्कूल चंपावत जिले के हैं)
तबादलों में खूब मनमानी हुई है। कहीं प्रधानाचार्यों के दिए अंकों को सही मानकर तबादले किए गए हैं तो कहीं बीईओ की ओर से तय अंकों के आधार पर। कुछ स्कूलों में तो दोनों के दिए अंकों को सही नहीं माना गया है। यह गलत है। कोई तो मानक होना चाहिए। शिक्षकों में इससे नाराजगी है।
- भगवान सिंह रावत, कोषाध्यक्ष, शिक्षक कल्याण समिति
वर्गीकरण ठीक करने के लिए हमारे पास समय नहीं था। हमें विसंगतियों की शिकायतें जरूर मिली थी, लेकिन इसके लिए तबादलों को नहीं रोका जा सकता था। अब अगले शिक्षा सत्र में दोबारा जांच कराकर इसे ठीक किया जाएगा।
- एनएस राणा, अपर शिक्षा निदेशक