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फार्मा उद्योग में हो रहे बदलाव और शोध पर मंथन का आयोजन
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एसोसिएशन आफ फार्मास्यूटिकल टीचर्स ऑफ इंडिया (एपीआईटी) का 24वां वार्षिक सम्मेलन एप्टिकॉन-2019 में फार्मा उद्योग में हो रहे नए बदलाव और रिसर्च पर विचार मंथन हुआ।
तीन दिवसीय एप्टिकॉन-2019 का शुभारंभ डीआईटी यूनिवर्सिटी के सहयोग से शुक्रवार को यूनिवर्सिटी के सभागार में हुआ। इसका शुभारंभ फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के वाइस प्रेजीडेंट डॉ. सराफ, पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रो-वाइस चांसलर डॉ. एसके कुलकर्णी, हिमालयन ड्रग के प्रेजीडेंट के डॉ. एस. फारुक, डीआईपीएसएआर यूनिवर्सिटी नई दिल्ली के वाइस चांसलर डॉ. रमेश गोयल और रिसर्च मनीपाल यूनिवर्सिटी के डॉ. एन. उडुपा ने संयुक्त रूप सेे किया। डॉ. सराफ ने कहा कि इस तरह के आयोजन और बैठकें फार्मास्यूटिकल से जुड़े छात्रों के लिए वरदान हैं। डॉ. फारुक ने छात्रों से कहा कि वे प्राकृतिक उत्पादों को बनाने में इस्तेमाल होने वाली नई तकनीकों को खुद को अपडेट रखें। उत्तराखंड औषधीय पौधों का एक केंद्र है जो फार्मा उत्पादों के निर्माण के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। डॉ. रमेश गोयल ने कहा कि लोगों को प्रशिक्षित करने और खुद को अपडेट करने के लिए ऐसे प्लेटफार्म की आवश्यकता है। एपीटीआई के अध्यक्ष डॉ. पीडी चौधरी और सचिव डॉ. रमन डांग ने बताया कि इस तरह की कार्यशालाएं छात्रों और शिक्षाविद्दों को शोध लेख और शोध परियोजनाएं लिखने में मददगार होती हैं। जो समय की आवश्यकता है।
वक्ताओं ने बताया कि एपीआईटी फार्मास्यूटिकल टीचर्स की बड़ी एसोसिएशन में से एक है। इस सम्मेलन में देशभर की विभिन्न शिक्षण संस्थानों के 1500 छात्रों ने हिस्सा लिया। इससे पहले डीआईटी यूनिवर्सिटी के चांसलर एन. रविशंकर और डॉ. माधव ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उत्तराखंड में यह एप्टिकॉन का आयोजन पहली बार हुआ है। यह सम्मेलन 13 अक्तूबर तक चलेगा।
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तीन दिवसीय एप्टिकॉन-2019 का शुभारंभ डीआईटी यूनिवर्सिटी के सहयोग से शुक्रवार को यूनिवर्सिटी के सभागार में हुआ। इसका शुभारंभ फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के वाइस प्रेजीडेंट डॉ. सराफ, पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रो-वाइस चांसलर डॉ. एसके कुलकर्णी, हिमालयन ड्रग के प्रेजीडेंट के डॉ. एस. फारुक, डीआईपीएसएआर यूनिवर्सिटी नई दिल्ली के वाइस चांसलर डॉ. रमेश गोयल और रिसर्च मनीपाल यूनिवर्सिटी के डॉ. एन. उडुपा ने संयुक्त रूप सेे किया। डॉ. सराफ ने कहा कि इस तरह के आयोजन और बैठकें फार्मास्यूटिकल से जुड़े छात्रों के लिए वरदान हैं। डॉ. फारुक ने छात्रों से कहा कि वे प्राकृतिक उत्पादों को बनाने में इस्तेमाल होने वाली नई तकनीकों को खुद को अपडेट रखें। उत्तराखंड औषधीय पौधों का एक केंद्र है जो फार्मा उत्पादों के निर्माण के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। डॉ. रमेश गोयल ने कहा कि लोगों को प्रशिक्षित करने और खुद को अपडेट करने के लिए ऐसे प्लेटफार्म की आवश्यकता है। एपीटीआई के अध्यक्ष डॉ. पीडी चौधरी और सचिव डॉ. रमन डांग ने बताया कि इस तरह की कार्यशालाएं छात्रों और शिक्षाविद्दों को शोध लेख और शोध परियोजनाएं लिखने में मददगार होती हैं। जो समय की आवश्यकता है।
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वक्ताओं ने बताया कि एपीआईटी फार्मास्यूटिकल टीचर्स की बड़ी एसोसिएशन में से एक है। इस सम्मेलन में देशभर की विभिन्न शिक्षण संस्थानों के 1500 छात्रों ने हिस्सा लिया। इससे पहले डीआईटी यूनिवर्सिटी के चांसलर एन. रविशंकर और डॉ. माधव ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उत्तराखंड में यह एप्टिकॉन का आयोजन पहली बार हुआ है। यह सम्मेलन 13 अक्तूबर तक चलेगा।
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