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इस बार समय से पहले खिल गया ब्रह्मकमल
कालिका रावल/ अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Tue, 06 Sep 2016 03:44 PM IST
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brahma kamal the lotus of lord brahma
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ग्लोबल वार्मिंग का असर कहें या पिछले साल की कम बर्फबारी इस बार समय से पहले ही हिमालयी क्षेत्र में ब्रह्मकमल खिल गया है।
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असमय खिलने पर ब्रह्मकमल जल्दी खराब हो जाते हैं। नौ सितंबर को नंदाष्टमी के दिन मां नंदा को ब्रह्मकमल चढ़ाए जाने हैं। अब हिमालय के नजदीक ही ब्रह्मकमल रह गए हैं। ब्रह्मकमल लाने में मां नंदा के भक्तों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
ब्रह्मकमल समुद्र तल से करीब 4000 मीटर की ऊंचाई में हीरामणि ग्लेशियर के निकट नंदा कुंड क्षेत्र के हीरामणि बुग्याल में खिलता है। अमूमन जुलाई अंत अथवा अगस्त माह में खिलने वाला ब्रह्मकमल इस बार जुलाई की शुरुआत में ही खिल गया। नामिक निवासी शिक्षक भगवान सिंह जेम्याल, बुजुर्ग बहादुर सिंह कन्यारी ने बताया कि चार अगस्त को गांव के लोग हीरामणि बुग्याल गए थे। हर तरफ ब्रह्मकमल खिला था।
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इन लोगों का कहना है कि समय से पहले खिलने से पुष्प खराब हो जाते हैं। पिछले साल काफी कम बर्फबारी हुई थी। कम बर्फबारी हो तो अगले साल ब्रह्मकमल जल्दी खिल जाते हैं। जेम्याल ने बताया कि नामिक, रातिर, केठी, होकरा, सैणराथी, गौला, विर्थी, डोर, गिरगांव, गिनी, सुरिंग आदि गांवों के लोग मां नंदा की पूजा के लिए पुष्प लाते हैं।
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ब्रह्मकमल लाने के लिए गांवों की वर्षवार बारी लगती है। इस बार नामिक, रातिर, केठी, डोर, गिन्नी गांव के लोगों की पुष्प लाने की बारी है। हीरामणि बुग्याल नामिक से 14, विर्थी से 30 किमी दूर है। काफी कठिन रास्ते से होकर वहां तक पहुंचना मुश्किल काम है। कहते हैं इस बार ब्रह्मकमल लाने के लिए हिमालय के नजदीक जाना पड़ेगा। ब्रह्मकमल लाने के लिए लोग गांवों से रवाना हो गए हैं।
यात्रियों को नहीं मिलती कोई सुविधा
नंदाकुंड यात्रा मुनस्यारी, तल्लाजोहार क्षेत्र की प्रमुख यात्राओं में शुमार है लेकिन सरकार की ओर से यात्रियों को किसी तरह की सुविधा नहीं मिलती। यात्रा मार्ग और यात्रीशेड तक नहीं बने हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि हीरामणि ग्लेशियर क्षेत्र के बुग्याल स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का भी प्रमुख साधन हो सकते हैं। लिहाजा इन स्थलों को पर्यटन से जोड़ा जाना चाहिए। नंदाकुंड तक ट्रैकिंग रूट और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम होना चाहिए।