जंगली फलों और मसालों के संरक्षण में जुटे वनस्पति विज्ञानी, हिमालयी क्षेत्रों में किया चिन्हित
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उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश समेत अन्य हिमालयी राज्यों में तेजी से खत्म हो रहे किलमोड़ा, हिसालू, काफल, तिमला जैसे पहाड़ी फलों व जंबू, कालाजीरा, वन हल्दी, वन अजवाइन और वन प्याज के संरक्षण की कवायद शुरू की गई है। पहाड़ के लोगों की आर्थिकी में इनकी अहम भूमिका है।
इनके संरक्षण को लेकर वन विभाग के अनुसंधान शाखा के वनस्पति विज्ञानियों की टीम राज्य के पहाड़ी इलाकों में भ्रमण कर वैज्ञानिक शोध करने के साथ ही इन फलों, मसालों की प्रजातियों के पौधों को इकट्ठा कर रही है। साथ ही इन प्रजातियों के फलों, मसालों के पौधों पर मौसम के प्रभाव व प्रदूषण के असर पर शोध किया जा रहा है।
वन अनुसंधान शाखा के निदेशक व वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि साल दर साल इन जंगली फलों व मसालों की प्रजातिया विलुप्त हो रही हैं। ऐसे में इन प्रजातियों के फलों व मसालों के संरक्षण को लेकर ‘प्रोटेक्शन ऑफ वाइल्ड स्पाइस, वाइल्ड फ्रूट एंड बेरी’ प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है।
सात साल तक चलने वाले इन प्रोडेक्ट को लेकर वन अनुसंधान शाखा के वनस्पति विज्ञानियों की टीम इन मसालोें, फलों के संरक्षण को तमाम शोध कर रही है। इसके लिए नैनीताल में कई हेक्टेयर में नर्सरी तैयार की जा रही है।
बकौल वन संरक्षक व वन अनुसंधान शाखा के निदेशक संजीव चतुर्वेदी, यदि इन मसालों, फलाें का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले समय में ये सभी प्रजातियां समाप्त हो जाएगी। जिसका सीधा असर पहाड़ के लोगों की आर्थिकी पर भी पड़ेगा।
राज्य में है जंगली फलों की 67 व सब्जियों की 27 प्रजातियां
वनस्पति विज्ञानियों की ओर से किए गए शोध में यह बात सामने आई है कि कुमाऊं व गढ़वाल क्षेत्र में जंगली फलों की 67 व सब्जियों की 27 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें तमाम ऐसी प्रजातियां हैं जो कई पर्यावरणीय व वैज्ञानिक कारणों के चलते लुप्तप्राय होने के कगार पर हैं जिनके संरक्षण की जरूरत है।
बहुतायत में पैदा होते हैं सेब, खुमानी, नाशपाती व प्लम
वनस्पति विज्ञानियों की मानें तो देवभूमि में सेब, नाशपाती, खुमानी व प्लम जैसे फल बहुतायत में होते हैं। इन फलों की वजह से पहाड़ के लोगों की आर्थिकी को मजबूती मिलती है। इन फलों पर व्यापारिक स्तर पर उत्पादन हो, इसके लिए राज्य सरकार की ओर से उद्यान विभाग के जरिए कई योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। जिनके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं।