उत्तराखंड: अब ब्लैक फंगस का इंजेक्शन बाजार से गायब, अचानक बढ़ी मांग
देश के कई हिस्सों में कोरोना संक्रमित मरीजों में स्टेरॉयड दवाओं के बेवजह इस्तेमाल से हो रहे घातक ब्लैक फंगस ने उत्तराखंड में भी दस्तक दे दी है।
विस्तार
उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण को कम करने वाले इंजेक्शन रेमडेसिविर के बाद अब ब्लैक फंगस का इंजेक्शन अम्फोटेरीसीन-बी भी बाजार से गायब हो गया है।अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में एक मरीज की मौत और जिले में 20 से अधिक मरीजों में ब्लैक फंगस होने के बाद चिंता बढ़ी हुई है।
ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों को देखते हुए अम्फोटेरीसीन बी इंजेक्शन समेत एंटी फंगल दवाओं की मांग अचानक से बढ़ गई है। जिले के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती इन मरीजों के लिए दिए जाने के लिए अम्फोटेरीसीन बी नामक इंजेक्शन बाजार से गायब हो रहा है।
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इंजेक्शन कहीं मिल भी रहा है तो इसकी अधिकतम दरें शासन-प्रसाशन ने तय नहीं की हैं। ऐसे में इस इंजेक्शन की कालाबाजारी की भी आशंका बढ़ गई है। पिछले तीन दिन में इसकी मांग काफी बढ़ गई है। अम्फोटेरीसीन बी इंजेक्शन के लिए लोगों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
इन मरीजों को ज्यादा खतरा
कोरोना संक्रमण से स्वस्थ हुए मरीज, जो अनियंत्रित मधुमेह से पीड़ित हैं या उन्हें इस दौरान स्टेरॉयड की ज्यादा मात्रा देनी पड़ी है, वह इसके खतरे की ज्यादा जद में हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इसके अलावा घर में ऑक्सीजन सिलिंडर का आसुत जल के बजाय टंकी के पानी का इस्तेमाल करने से भी यह दिक्कत बढ़ती है।
जल्द दूर होगी दिक्कत
जिले के वरिष्ठ औषधि निरीक्षक नीरज कुमार ने बताया कि ब्लैक फंगस के मामले अचानक आने के बाद डॉक्टरों ने इसके इंजेक्शन और एंटी फंगल दवा लिखनी शुरू कर दी है। पहले से विभिन्न गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाले यह इंजेक्शन और अन्य दवाएं मांग के हिसाब से कम पड़ रही हैं।
उच्चाधिकारियों के दिशा-निर्देशन में इन दवाओं की कमी जल्द दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ दिन में यह दिक्कत दूर हो जाएगी। दवाओं की कालाबाजारी किसी भी सूरत में नहीं होने दी जाएगी।
देश के विभिन्न क्षेत्रों में अप्रैल के अंतिम सप्ताह में ब्लैक फंगस के मामलों के आने से हम लोग भी अलर्ट हो गए थे। ब्लैक फंगस में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन अम्फोटेरीसीन-बी और अन्य एंटी फंगल दवाओं को एचआईवी संक्रमित और कैंसर आदि के मरीजों को दिया जाता रहा है। अचानक मांग बढ़ने पर हमने विभिन्न कंपनियों से संपर्क कर इन इंजेक्शन को उपलब्ध कराने के लिए डिमांड भेज दी है। उम्मीद है कि जल्द ही ये इंजेक्शन और दवाएं मिल जाएंगी।
-डॉ. केसी पंत, चिकित्सा अधीक्षक, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल