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सुनहरे रोजगार का जरिया बनेगा काला बांस, आकर्षक फर्नीचर खरीदेगी स्वीडन की कंपनी आईकिया
Sat, 29 Aug 2020 04:28 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 29 Aug 2020 04:28 PM IST
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वन अनुसंधान संस्थान
- फोटो : File Photo
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दुनिया में काले बांस से बने आकर्षक फर्नीचर का कारोबार करने वाली स्वीडन की सबसे बड़ी कंपनी आईकिया देश में भारी निवेश करेगी। साथ ही काले बांस से बने फर्नीचर को कई देशों में निर्यात भी करेगी। इससे यहां किसानों और कारीगरों को काफी काम मिलेगा। इसके लिए वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने काम शुरू कर दिया है।
वन अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अजय ठाकुर के मुताबिक काले बांस से बने आकर्षक फर्नीचर की पूरी दुनिया में भारी मांग है। आईकिया काले बांस के फर्नीचर का कारोबार करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है। यह कंपनी अब भारत में कारोबार करना चाहती है। जिसके लिए कंपनी ने मिजोरम सरकार के साथ समझौता भी किया है। अब वन अनुसंधान संस्थान यह संभावनाएं तलाश रहा है कि काले बांस के अधिक से अधिक उत्पादन को लेकर क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
ठाकुर ने बताया कि संस्थान परिसर में काले बांस का उत्पादन किया जा रहा है। जिससे आकर्षक फर्नीचर भी बनाए गए हैं। देश के सभी राज्यों में काले बांस का बड़े पैमाने पर उत्पादन हो और इससे अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल सके, इसको लेकर संस्थान के स्तर पर कार्य योजना तैयार की जा रही है। जिसके तहत किसानों को संस्थान स्तर पर हरसंभव मदद की जा रही है। साथ ही फर्नीचर बनाने का काम करने वालों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
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एफआरआई में बनाया काले बांस का अतिथि गृह
ठाकुर ने बताया कि संस्थान परिसर में काले बांस से अतिथि गृह तैयार किया गया है। जिसमें कमरे से लेकर बाथरूम समेत सभी चीजें बांस से बनाई गई हैं। यदि काले बांस का अधिक से अधिक उत्पादन किया जाए तो इससे बेहद कम लागत में छोटे घरों का भी निर्माण किया जा सकता है।
देश में होता है 33.3 करोड़ टन बांस का उत्पादन
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में हर साल कुल 33.3 करोड़ टन बांस का उत्पादन होता है। बांस उत्पादन के मामले में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। देश में 1.4 करोड़ हेक्टेयर में 136 प्रजातियों के बांस का उत्पादन होता है।
रात में 30 प्रतिशत अधिक ऑक्सीजन छोड़ता है बांस का पौधा
वैज्ञानिक शोध में यह बात सामने आई है कि पीपल की तर्ज पर बांस का पौधा भी रात में अधिक से अधिक ऑक्सीजन छोड़ता है। जबकि दिन में कार्बन डाइऑक्साइड गैस को अवशोषित करता है। वैज्ञानिक शोध में इस बात का भी पता चला है कि अन्य पेड़ों की तुलना में बांस 30 प्रतिशत अधिक ऑक्सीजन छोड़ता है। ऐसे में यदि बांस को घरों के आसपास लगाया जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी है।
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वन अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अजय ठाकुर के मुताबिक काले बांस से बने आकर्षक फर्नीचर की पूरी दुनिया में भारी मांग है। आईकिया काले बांस के फर्नीचर का कारोबार करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है। यह कंपनी अब भारत में कारोबार करना चाहती है। जिसके लिए कंपनी ने मिजोरम सरकार के साथ समझौता भी किया है। अब वन अनुसंधान संस्थान यह संभावनाएं तलाश रहा है कि काले बांस के अधिक से अधिक उत्पादन को लेकर क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
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ठाकुर ने बताया कि संस्थान परिसर में काले बांस का उत्पादन किया जा रहा है। जिससे आकर्षक फर्नीचर भी बनाए गए हैं। देश के सभी राज्यों में काले बांस का बड़े पैमाने पर उत्पादन हो और इससे अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल सके, इसको लेकर संस्थान के स्तर पर कार्य योजना तैयार की जा रही है। जिसके तहत किसानों को संस्थान स्तर पर हरसंभव मदद की जा रही है। साथ ही फर्नीचर बनाने का काम करने वालों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
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एफआरआई में बनाया काले बांस का अतिथि गृह
ठाकुर ने बताया कि संस्थान परिसर में काले बांस से अतिथि गृह तैयार किया गया है। जिसमें कमरे से लेकर बाथरूम समेत सभी चीजें बांस से बनाई गई हैं। यदि काले बांस का अधिक से अधिक उत्पादन किया जाए तो इससे बेहद कम लागत में छोटे घरों का भी निर्माण किया जा सकता है।
देश में होता है 33.3 करोड़ टन बांस का उत्पादन
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में हर साल कुल 33.3 करोड़ टन बांस का उत्पादन होता है। बांस उत्पादन के मामले में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। देश में 1.4 करोड़ हेक्टेयर में 136 प्रजातियों के बांस का उत्पादन होता है।
रात में 30 प्रतिशत अधिक ऑक्सीजन छोड़ता है बांस का पौधा
वैज्ञानिक शोध में यह बात सामने आई है कि पीपल की तर्ज पर बांस का पौधा भी रात में अधिक से अधिक ऑक्सीजन छोड़ता है। जबकि दिन में कार्बन डाइऑक्साइड गैस को अवशोषित करता है। वैज्ञानिक शोध में इस बात का भी पता चला है कि अन्य पेड़ों की तुलना में बांस 30 प्रतिशत अधिक ऑक्सीजन छोड़ता है। ऐसे में यदि बांस को घरों के आसपास लगाया जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी है।