PM मोदी की मौजूदगी में संस्कृत में शपथ लेंगे उत्तराखंड के विधायक
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प्रचंड बहुमत से उत्तराखंड में सरकार बनाने जा रही बीजेपी पहले दिन से अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने जा रही है। इस क्रम में संस्कृत भाषा के प्रमोशन पर सरकार ठोस संदेश दे सकती है। बीजेपी के कई विधायक संस्कृत में शपथ ले सकते हैं।
इसके लिए उन्होंने अपनी सहमति प्रकट की है। संघ के आनुसांगिक संगठन संस्कृत भारती ने माहौल बनाने के लिए इस संबंध में मुहिम छेड़ दी है। संस्कृत भारती का दावा है कि ज्यादातर बीजेपी विधायक संस्कृत में ही शपथ लेंगे।
उत्तराखंड में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त है, लेकिन ये भी सच्चाई है कि न तो सामान्य व्यवहार और न ही राजकाज में कहीं संस्कृत दिखाई दे रही है। निशंक सरकार ने संस्कृत भाषा के प्रमोशन के लिए विधानसभा में सभी मंत्रियों के कक्ष में संस्कृत में लिखी नेम प्लेट लगवा दी थीं।
हरीश रावत सरकार के जमाने में संस्कृत शिक्षा विभाग ने कई योजनाएं बनाई थीं
ये अलग बात है कि जैसे ही कांग्रेस की सरकार सत्तासीन हुई, ये नेमप्लेट उखाड़ ली गईं। उत्तराखंड में बीजेपी पहली बार प्रचंड बहुमत से जीती है। इसलिए वह पहले दिन से अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहती है। उसकी मातृ संस्था आरएसएस की भी ये ही इच्छा निकलकर आई है।
इस क्रम में संस्कृत भारती संगठन ने एक-एक विधायक से संपर्क साधना शुरू किया है। अभी तक कई विधायकों से इस संबंध में बात की जा चुकी है। विधायक भरत चौधरी, शक्तिलाल शाह, मुकेश कोली और नवीन दुम्का ने संस्कृत में शपथ लेने पर सहमति प्रकट की है। संस्कृत भारती के प्रदेश अध्यक्ष डा. बुद्घदेव शर्मा के अनुसार बीजेपी के विधायक हमारे संगठन की पहल का स्वागत कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि ज्यादातर विधायक संस्कृत में शपथ लेंगे।
जीओ संस्कृत में कराने का था विचार
हरीश रावत सरकार के जमाने में संस्कृत शिक्षा विभाग ने कई योजनाएं बनाई थीं, लेकिन इन पर कार्रवाई नहीं हो पाई थी। संस्कृत शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी की उदासीनता भी इसमें आडे़ आई थी। संस्कृत शिक्षा विभाग के एक अफसर के अनुसार, जीओ संस्कृत में कराने का प्रस्ताव भी लगभग तैयार कर लिया गया था, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई।