Uttarakhand: 'बहन जी' बोला और महेंद्र भट्ट छात्रसंघ का चुनाव हार गए... पूर्व सीएम ने सुनाया ये दिलचस्प किस्सा
भाजपा प्रांतीय परिषद की बैठक में पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत ने नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से जुड़े रोचक किस्से सुनाए। इस दौरान पूरा माहौल ठहाकों से गूंज उठा।
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प्रांतीय परिषद की बैठक के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने दूसरी बार प्रदेश अध्यक्ष बने महेंद्र भट्ट के जीवन से जुड़े कुछ ऐसे रोचक किस्से सुनाए कि पूरा माहौल ठहाकों से गूंज गया। महेंद्र भट्ट छात्र संघ चुनाव को लेकर सुनाया गया किस्सा तीरथ सिंह ने बड़े ही दिलचस्प अंदाज में सुनाया।
उन्होंने कहा, बचपन से ही महेंद्र भट्ट आरएसएस से जुड़े रहे। आरएसएस में ''जी'' लगाकर बोलने की परंपरा है। इसी तरह से महिलाओं को सम्मान के साथ ''बहन जी'' बोलने का संस्कार है। इसके बाद उन्होंने इसे महेंद्र भट्ट के छात्रसंघ चुनाव से जोड़ा। कहा कि 1993 में भट्ट को ऋषिकेश महाविद्यालय से छात्रसंघ का चुनाव लड़ाया गया, लेकिन वह चुनाव हार गए।
इसकी समीक्षा करने नेतृत्व ने उन्हें भेजा। जब महेंद्र समर्थकों से हार का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि चुनाव में सबसे अधिक चर्चा महेंद्र भट्ट की थी और उनकी तैयारी भी अच्छी थी, लेकिन वह महिलाओं को ''हाय हेलो'' नहीं बोलते थे, बल्कि ''बहन जी'' बोलते थे। कॉलेज में ''बहन जी'' बोलना यानी चुनाव हारना।
शादी के पांच दिन बाद पहुंच गए हवालात
तीरथ ने महेंद्र भट्ट से जुड़े एक और किस्से का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब वह संगठन मंत्री थे, तो उस दौरान भाजपा ने संघर्ष यात्रा निकाली थी। भाजपा की संघर्ष यात्रा देहरादून के रिस्पना पुल से होते हुए ऋषिकेश पहुंची। ऋषिकेश में पुलिस-प्रशासन ने उन्हें रोक लिया। इस वजह से भाजपा नेताओं की पुलिस से बहस भी हुई। वह तो आगे निकल गए महेंद्र व कुछ कार्यकर्ता पीछे छूट गए। महेंद्र भट्ट को चार-पांच दिन जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। चिंता की बात यह थी कि इस घटना से पांच दिन पहले ही महेंद्र भट्ट की शादी हुई थी।
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इन बहन जी से आपकी शादी हो गई है
उन्होंने महेंद्र भट्ट की शादी से जुड़ा एक और रोचक किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि शादी के दौरान सभी लोग दावत खा रहे थे। इसी दौरान बगल में बैठी महिला को महेंद्र ने कहा कि यह बहन जी कौन हैं। तो मैंने कहा, इन बहन जी से आपकी शादी हो गई है। इससे पहले कि तीरथ अगला किस्सा सुनाते कार्यक्रम का संचालन कर रहे कुलदीप कुमार ने उन्हें पर्ची थमा दी और उन्हें वहीं रुकना पड़ा।
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