रुड़कीः लंढौरा बवाल का जायजा लेने जा रहे कई BJP नेता गिरफ्तार
रुड़की के लंढौरा में हुए बवाल के बाद शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए पुलिस ने जिले में नेट की कनेक्टिविटी बंद करा दी है। वहीं दूसरी ओर बवाल की आग थमने के बाद राजनीतिक आग सुलगने लगी है। खासतौर से भाजपा और कांग्रेस की ओर से बवाल को लेकर सियासत तेज हो गई है। दोनों ही बवाल के लिए एक दूसरे को दोषी ठहराने में लगे हैं।
गुरुवार को घटना के दूसरे दिन भाजपा और कांग्रेस के रणनीतिकार बवाल के लिए एक दूसरे को दोषी ठहराते नजर आए। पहले कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चौधरी राजेंद्र सिंह और कलियर विधायक फुरकान अहमद की ओर से पत्रकारवार्ता कर पूरे प्रकरण के लिए भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन को दोषी बताया गया।
इसके बाद धीरेंद्र प्रताप की अगुवाई में कांग्रेस की पांच सदस्यीय टीम ने दून से लक्सर पहुंचकर पत्रकारवार्ता की। फिर लंढौरा पहुंचकर हालात का जायजा लिया। इस दौरान नाटकीय तरीके से उनकी सियासी गिरफ्तारी भी हुई। सियासत में भाजपाई भी पीछे नहीं रहे।
सुबह से शुरू हुई सरगर्मी के बाद जिले के सभी विधायक और जिलाध्यक्ष हरिद्वार में एकत्रित हुए। इसके बाद लंढौरा के लिए रवाना हुए, लेकिन पतंजलि के पास पुलिस टीम ने उन्हें रोक लिया, जहां भाजपाइयों ने धरना शुरू कर दिया। मजबूरी में पुलिस ने सभी भाजपा विधायकों को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन भेज दिया। इसमें हरिद्वार से नगर विधायक मदन कौशिक, विधायक यतीश्वरानंद, विधायक चंद्रशेखर, विधायक संजय गुप्ता, विधायक आदेश चौहान, भाजपा में शामिल हुए कांग्रेस के बागी और पूर्व विधायक प्रदीप बत्रा, जिलाध्यक्ष कल्पना सैनी आदि शामिल थे।
जिले में नेट कनेक्टिविटी बंद
शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए पुलिस ने जिले में नेट की कनेक्टिविटी बंद करा दी है। इससे अधिकांश कंपनी के नेट उपभोक्ता बृहस्पतिवार को दिनभर परेशान रहे। वहीं पुलिस ने क्षेत्र में शांति व्यवस्था के लिए फ्लैग मार्च कर लोगों से अपील की। दूसरे दिन में जिले में धारा-144 लागू रही।
लंढौरा में एक दुकान खाली कराने को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद हुए बवाल से न सिर्फ जिले की बल्कि राज्य की सियासत गरमा गई है। इससे पहले क्षेत्र में शांति व्यवस्था के लिए पूरे जिले की नेट कनेक्टिविटी ठप करा दी गई, ताकि बवाल को भड़कने से रोका जा सके।
इससे बृहस्पतिवार को हजारों की संख्या में नेट उपभोक्ता परेशान रहे। लोग नेट ठप होने के संबंध में एक दूसरे से जानकारी लेते रहे। यही नहीं नेट नहीं चलने पर लोगों ने मोबाइल दुकानों पर भी संपर्क किया। इससे दुकानदार भी परेशान रहे। खासतौर से जिले के अधिकांश साइबर कैफे ठप रहे। दूसरी ओर बवाल को लेकर भाजपा और कांग्रेस की ओर से सियासत होती रही।
क्षेत्र में शांति व्यवस्था के लिए नेट को बंद कराया गया है, ताकि अराजक तत्व बवाल को हवा न दे सके। साथ ही पूरे जिले में धारा-144 लागू की गई है। इसके तहत सार्वजनिक स्थलों पर पांच या पांच से अधिक व्यक्ति एकत्रित नहीं हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि नेट बंद होने से पुलिस को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन सुरक्षा और एहतियात के लिहाज से यह जरूरी है। इससे एक दो दिन और लोगों को परेशानी हो सकती है।
- लोकेश्वर सिंह, एएसपी, मंगलौर