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उत्तराखंड मोदी को थमाएगा मुरझाया 'कमल'
अमर उजाला, देहरादून, अजित सिंह राठी
Updated Tue, 27 Aug 2013 05:20 PM IST
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रामनगर में आयोजित भाजपा की दो दिवसीय कार्य समिति की बैठक में भविष्य का अलार्म बच गया है। बहुत स्पष्ट है कि यदि पार्टी के भीतर क्षत्रपों में गुटबाजी दूर ना हुई तो लोकसभा चुनाव में स्कोर सुधारने की उम्मीद छोड़नी पड़ेगी।
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क्योंकि अगला लोकसभा चुनाव प्रदेश के सभी क्षत्रपों के साथ ही उन प्रदेश प्रभारियों का रिपोर्ट कार्ड भी तैयार करेगा जिनका फोकस उत्तराखंड के बजाय बिहार की अपनी लोकसभा सीट पर है।
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विधानसभा चुनाव के बाद हार जीत के आरोप मढ़ने का जो सिलसिला शुरू हुआ था उसका हैंगओवर रामनगर में आयोजित प्रदेश कार्यसमिति में भी दिखा।
प्रदेश अध्यक्ष निष्क्रिय
बड़े नेताओं की कथित एकता 2014 के मोदी मिशन को भी क्षति पहुंचा सकती है। इसी क्रम में अब एक खेमा प्रदेश अध्यक्ष को निशाने पर लेने के लिए तैयार है।
खुलकर तो नहीं लेकिन इस खेमे का आरोप है कि संगठन पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुका है और एक ही गुट के नेताओं को तवज्जों दी जा रही है।
गुटबाजी में माहिर
प्रदेश अध्यक्ष की लड़ाई को लेकर कोश्यारी व खंडूड़ी खेमे के आमने-सामने आ जाने का असर अभी भी दिखता है।
चिंता यही है कि पिछली बार पांचों सीट हारने वाली भाजपा के क्षत्रप अभी भी सतर्क होने को तैयार नहीं है। निकाय चुनाव में चार नगर निगम जीतने की मुनादी का शोर बहुत ज्यादा दिन सुनाई नहीं देगा।
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अपनी सीट तो बचा लूं...
नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी राधा मोहन सिंह से भी उम्मीदें तो बहुत थीं, लेकिन कुछ खास होता नहीं दिखा। इस बात का जिक्र अब होने लगा है कि प्रभारी को उत्तराखंड संगठन को मजबूती देने के बजाय बिहार में अपने लोकसभा क्षेत्र की ज्यादा चिंता है।
यही वजह है कि प्रदेश संगठन का सुपरविजन भी कम हो रहा है। फिलहाल जो परिदृश्य है उसके हिसाब से भाजपा में कांग्रेस से कम घमासान नहीं है।
इनकी भी सुनिए
पार्टी के भीतर सभी नेता एकजुट हैं। गुटबाजी की खबरें दुष्प्रचार का परिणाम है और भाजपा अगले लोकसभा चुनाव में पांचों सीटें जीतने जा रही है। क्योंकि नेता नहीं पार्टी ही सर्वोपरि होती है। और, यहां किसी केबीच कोई मतभेद नहीं है।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, राष्ट्रीय सचिव भाजपा