फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   bjp in 2013

नरेंद्र मोदी की दहाड़ से 'उपद्रवी' हुए शांत

Mon, 30 Dec 2013 10:26 AM IST
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 30 Dec 2013 10:26 AM IST
विज्ञापन
bjp in 2013

उत्तराखंड में साल 2013 की शुरुआत भाजपा में भारी उठापटक के साथ हुई। प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर दो पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी व भगत सिंह कोश्यारी आमने सामने थे।

विज्ञापन


लेकिन साल जाते जाते पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र भाई मोदी की पंद्रह दिसंबर को ऐतिहासिक रैली ने भाजपा में उत्साह भर दिया।

विधायकों में हस्ताक्षर अभियान शुरु हुआ
लंबी जद्दोजहद के बाद नए प्रदेश अध्यक्ष की ताजपोशी हुई तो दागियों को जिम्मेदारी देने के खिलाफ विधायकों में हस्ताक्षर अभियान शुरू हो गया। अंदरुनी लड़ाई ने छीछालेदार कराई लेकिन निकाय चुनाव में अपेक्षित सफलता ने कुछ राह भी दिखाई।
विज्ञापन


राष्ट्रीय टीम गठित हुई तो प्रदेश का कोटा कम कर दिया गया, एकमात्र त्रिवेंद्र सिंह रावत राष्ट्रीय सचिव के रूप में टीम राजनाथ में जगह मिली। जनवरी 2013 में जितनी ठंड़ थीं भाजपा में उससे ज्यादा गर्मी का अहसास था।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रदेश अध्यक्ष के लिए तीरथ सिंह रावत व त्रिवेंद्र सिंह रावत आमने सामने थे। नामांकन हुए लेकिन चुनाव नहीं हुआ। रार इतनी बढ़ी कि केंद्रीय नेतृत्व को चुनाव स्थगित करना पड़ा।

नौ फरवरी 2013 को तीरथ सिंह रावत को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की घोषणा दिल्ली में पार्टी महासचिव अनंत कुमार ने की।

कुछ दागियों को मिली जिम्मेदारी
कुछ ही दिन बाद जब प्रदेश कमेटी गठित हुई तो कुछ दागियों को मिली जिम्मेदारी के खिलाफ पार्टी विधायकों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर प्रदेश प्रभारी राधा मोहन सिंह को पत्र दिया गया।

इसी बीच राजनाथ की टीम गठित हुई और प्रदेश से अकेले त्रिवेंद्र सिंह रावत को संगठन में राष्ट्रीय सचिव बनने का सौभाग्य मिला। आला कमान ने उन्हें यूपी का सह प्रभारी बनाकर आगे बढ़ाया।

उठापटक चल ही रही थीं कि निकाय चुनाव आ गए। भाजपा ने छह में से चार नगर निगमों में मेयर की सीट जीतकर कांग्रेस को चुनौती दी। यह चुनाव पार्टी के लिए ऑक्सीजन की तरह रहे।

सितम्बर में आयोजित विधानसभा के सत्र में सदन केभीतर ही पूर्व सीएम निशंक व नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट के बीच मोर्चा संभालने की जो होड़ दिखाई दी उससे पार्टी के भीतर की स्थिति काफी असहज हुई।

कई तरह के मतभेद सामने आए
रामनगर में हुई प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में भी कई तरह के मतभेद सामने आए। लेकिन पार्टी ने दैवी आपदा के मुद्दे पर सरकार को कई बार घेरा। इसके बाद सरकारी चीनी मिलों को पीपीपी मोड में दिए जाने के सरकार के फैसले के पलटवाने में भी भाजपा की मुख्य भूमिका रही।


साल जाते जाते नरेंद्र भाई मोदी की पंद्रह दिसंबर को हुई रैली ने कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह का संचार भी किया जो नए साल में ऊर्जा देने के लिए काफी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed