फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   BJP defeated in jilla panchayat chairman election uttarakhand

अमित शाह के 'डर' के आगे भी जीत नहीं पाई बीजेपी

Wed, 06 Aug 2014 12:05 PM IST
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 06 Aug 2014 12:05 PM IST
विज्ञापन
BJP defeated in jilla panchayat chairman election uttarakhand

नए-नवेले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित की उत्तराखंड उप-चुनाव में करारी मात के बाद पिलाई गई झाड़ और नसीहतों के बाद भी प्रदेश भाजपा के नेताओं ने कोई सबक नहीं लिया।

विज्ञापन


न कुनबे की अंदरूनी कलह रुकी, न ही एकजुटता बन पाई। नतीजा हार की हैट्रिक के रूप में सामने है। पिछले जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस ने दो सीटें जीत पाई थी, इस बार के परिणाम बिलकुल उलट हैं। अब भाजपा दो की संख्या पर सिमट गई है।
विज्ञापन


चुनाव जीतने के लिए कुशल और ठोस प्रबंधन के बजाय भाजपाई बयानबाजी में मशगूल रहे। ऊधमसिंहनगर में पार्टी ने पहले ही हथियार डाल दिए थे।

मोर्चाबंदी में हाथ से निकली उत्तरकाशी की सीट

BJP defeated in jilla panchayat chairman election uttarakhand

विगत दिवस ही प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत के आगाह करने के बावजूद अध्यक्ष पद की प्रत्याशी मधु चौहान को कम और उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी सुभाष शर्मा को सत्रह वोट मिलना क्रास वोटिंग की कहानी बयां कर रहा है।

उत्तरकाशी में पार्टी विधायक मालचंद और दूसरे धड़े की मोर्चाबंदी में यहां की सीट हाथ से निकल गई। टिहरी में भी बमुश्किल इज्जत बची।

कुमाऊं के कई जिलों में तो हालात और भी ज्यादा खराब दिखे। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह रही कि तीन विस सीटों के उपचुनाव में मिली पराजय के बाद भी बड़े नेताओं ने एकजुट होकर ऐसी कोई रणनीति नहीं बनाई जिससे इज्जत बचाई जा सके।

नैनीताल में मुकाबला कांटे का

BJP defeated in jilla panchayat chairman election uttarakhand

भाजपा में लोकसभा चुनाव जीतकर पराये से हुए सांसद और स्थानीय गणित में उलझे विधायकों ने भी पार्टी की फजीहत की परवाह नहीं की।

भाजपा की जिला इकाइयां मूक बनकर बस बयानबाजी करती रहीं कि सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल हो रहा है। चुनाव में जिस संसाधन की आवश्यकता थी चाहकर भी प्रदेश नेतृत्व पूरा नहीं कर सका।

कुमाऊं की बात करें भाजपा यहां सबसे ज्यादा कमजोर साबित हुई। ऊधमसिंह नगर में तो भाजपा अपना उम्मीदवार भी नहीं उतार सकी और सीट एक तरह से तश्तरी में सीधे तौर पर कांग्रेस को पेश कर दी।

रोचक बात यह है कि जिले में नौ में से छह विधायक भाजपा के हैं। बताते हैं कुछ भाजपा विधायक तो कांग्रेस उम्मीदवार के लिए लामबंदी कर रहे थे। नैनीताल में मुकाबला कांटे का रहा।

यहां भी भाजपा विधायक बंसीधर भगत जिन सुमित्रा प्रसाद को कुछ समय पहले भाजपा में लाए थे वो कांग्रेस बनकर जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गई हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed