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Uttarakhand: दो बेटियों के जन्मदर में पौड़ी गढ़वाल और ऊधम सिंह नगर सबसे आगे, दूसरे-तीसरे नंबर पर हैं ये जिले

Fri, 11 Apr 2025 02:35 PM IST
रेनू सकलानी अवनीश चौधरी, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अवनीश चौधरी, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 11 Apr 2025 02:35 PM IST
सार

दो बेटियों के जन्मदर में पौड़ी गढ़वाल और ऊधम सिंह नगर सबसे आगे हैं। दोनों जिलों में बेटियों के जन्म लक्ष्य में 106 प्रतिशत सफलता मिली।

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Birth rate of daughters Pauri and Udham Singh Nagar are leading in birth rate of two daughters Uttarakhand
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

बच्चे दो ही अच्छे और दोनों हों बेटियां तो प्रोत्साहन देना है प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लक्ष्य। इसमें उत्तराखंड को बड़ी सफलता मिली है। राज्य में बीते वित्तीय वर्ष में 69 हजार से ज्यादा परिवारों में दो बेटियों ने जन्म लिया है। दो बेटियों के जन्म को प्रोत्साहन देने के लिए बाकायदा लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसे हासिल करने में पौड़ी गढ़वाल और ऊधम सिंह नगर सबसे आगे रहे हैं। देहरादून और बागेश्वर में भी 100 फीसदी से अधिक सफलता मिली है।

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महिला सशक्तीकरण एवं बाल कल्याण विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए प्रथम बालिका पंजीकरण का लक्ष्य 58,173 रखा, जिसके मुकाबले 51,790 पंजीकरण हुए। दूसरी संतान भी बालिका हो, इसके लिए 21,105 पंजीकरण का लक्ष्य रखा, जिसकी तुलना में 17,527 पंजीकरण हुए हैं। इसके तहत 1.34 लाख महिलाओं को करीब 41 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता राशि जारी की गई है।

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केंद्र पोषित योजनाओं की राज्य नोडल अधिकारी आरती बलोदी ने बताया कि मातृ वंदन योजना के तहत नए वित्तीय वर्ष (2025-26) के लिए कुछ जिलों के लिए लक्ष्य बढ़ाने की कोशिश रहेगी, ताकि गर्भवती महिलाओं को प्रोत्साहन और सुविधाएं देने के साथ बेटी बचाओ अभियान को भी बढ़ावा दिया जा सके।

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मातृ वंदन योजना

इसके तहत गर्भवती महिलाओं को पहली बेटी के जन्म पर दो किश्तों में पांच हजार रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। उसके बाद दूसरी संतान भी बेटी हुई तो छह हजार रुपये की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि सीधे बैंक खाते में दी जाती है। योजना का लाभ उठाने के लिए गर्भवती महिलाओं को आंगनबाड़ी या स्वास्थ्य केंद्र पर पंजीकरण कराना होता है।

जिलावार प्रदर्शन (1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 तक)

पौड़ी गढ़वाल में पहली बालिका के जन्म पंजीकरण का लक्ष्य 1790 रखा गया था, जिसमें 1926 पंजीकरण हुए। वहीं दूसरी संतान भी बालिका होने का अनुमानित लक्ष्य 596 रखा गया था, जिसमें 607 पंजीकरण हुए। इस तरह पौड़ी में सफलता दर 106 फीसदी रही। इसी तरह देहरादून, बागेश्वर और ऊधम सिंह नगर ने भी अपने कुल पंजीकरण लक्ष्य को 100 फीसदी से अधिक हासिल किया है। अन्य कई जिलों में भी प्रगति संतोषजनक रही। चमोली में तय लक्ष्य से 88 फीसदी, चंपावत में 76 फीसदी, नैनीताल में 84 फीसदी, रुद्रप्रयाग में 98 फीसदी और उत्तरकाशी में 79 फीसदी पंजीकरण दर्ज किए गए।

ये जिले पिछड़े

पिथौरागढ़ में लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 45 फीसदी पंजीकरण ही दर्ज हुए, जो विभाग की चिंता का विषय है। हरिद्वार में 73 फीसदी और टिहरी गढ़वाल में भी 75 फीसदी पंजीकरण हुए।

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पहली और दूसरी बालिका के जन्म पंजीकरण में उत्साहजनक प्रगति देखने को मिली है। नए वित्तीय वर्ष में नया लक्ष्य निर्धारित, ताकि राज्य के प्रत्येक जिले में कोई मां सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे, जिन जिलों में पंजीकरण कम हुए, वहां कारणों की समीक्षा की जाएगी। -प्रशांत आर्य, निदेशक, महिला सशक्तीकरण एवं बाल कल्याण

 

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