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Dehradun News: फल व सब्जी मंडियों के कचरे से बनेगी बायोगैस

Mon, 19 Oct 2026 02:28 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2026 02:28 AM IST
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Biogas will be produced from the waste of fruit and vegetable markets.
देहरादून। प्रदेश की फल-सब्जी मंडियों के कचरे से बायो गैस बनाने की कवायद शुरू हो गई है। नेशनल काउंसिल ऑफ स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड की ओर से किच्छा व विकासनगर में कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाने की डीपीआर तैयार की जा रही है। बायोगैस प्लांट लगने से मंडियों के कचरे का वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण हो सकेगा।
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गुजरात की तर्ज पर नेशनल काउंसिल ऑफ स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड की उत्तराखंड में बायोगैस प्लांट लगाने योजना है। इसके लिए किच्छा व विकासनगर मंडी में बायोगैस प्लांट की डीपीआर बनाई जा रही है। गुजरात के अहमदाबाद में 2018 में बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया था। जहां पर मंडियों के कचरे से बायोगैस बनाई जा रही है। गेल कंपनी के माध्यम से बायोगैस की खरीद की जाएगी।
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नेशनल काउंसिल ऑफ स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के प्रबंध निदेशक जेएस यादव ने बताया कि बायो गैस प्लांट लगने से मंडियों से रोजाना निकलने वाले कचरे का इस्तेमाल किया सकेगा। इससे कचरे के निस्तारण की समस्या का समाधान होगा। बोर्ड की ओर से उत्तराखंड के अलावा बंगलूरू, हिमाचल के पांवटा साहिब, हरियाणा के पटियाला में बायोगैस प्लांट लगाने की योजना बनाई जा रही है। 100 टन क्षमता के बायोगैस प्लांट की लागत 30 करोड़ तक आती है। कई निवेशक भी प्लांट लगाने में आगे आ रहे हैं।
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उत्तराखंड कृषि उपज एवं विपणन बोर्ड के डीजीएम विजय थपलियाल ने बताया कि मंडियों के कचरे का निपटारा करने की एक बड़ी समस्या रहती है। नेशनल काउंसिल ऑफ स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड की ओर से बायोगैस प्लांट की डीपीआर प्राप्त होने पर उसे बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा।

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25 मंडियों से रोज निकलता है 240 टन कचरा
वर्तमान में प्रदेश में 25 फल व सब्जी मंडियों चल रही हैं। इन मंडियों से रोजाना 240 टन कचरा एकत्रित होता है। वर्तमान में मंडियों का कचरा कूड़ा डंपिंग जोन में भेजा जाता है। कचरे से तैयार बायोगैस को गेल कंपनी 105 रुपये किलो तक में खरीद रही है।
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