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छात्रवृत्ति घोटाले की जांच को लेकर हुआ बड़ा खुलासा, विभाग ने इस तरह से कर दिया पूरा 'खेल' 

Sun, 09 Dec 2018 09:39 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 09 Dec 2018 09:39 AM IST
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Big fraud in scholarship scam Investigation uttarakhand
घोटाला - फोटो : amar ujala

छात्रवृत्ति घोटाले की एसआईटी (विशेष जांच दल) की जांच का दायरा सीमित करने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। इसकी गवाही एसआईटी जांच को लेकर समाज कल्याण और गृह विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक का एक कार्यवृत्त (प्रोसीडिंग) दे रहा है।

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कार्यवृत्त में एसआईटी जांच को उन्हीं संस्थानों तक सीमित करने की अपेक्षा की गई है, जिनके बारे में शिकायत की गई है। इस मामले में तब और अजीबोगरीब स्थिति आई जब अमर उजाला ने अपर सचिव, समाज कल्याण, डॉ. राम विलास यादव से इस मामले में उनका पक्ष पूछा, उन्होंने यह कहते हुए चौंका दिया कि भले ही कार्यवृत्त मेरे हस्ताक्षरों से जारी किया गया है, लेकिन मैं खुद इस बैठक में मौजूद नहीं था। लिहाजा मैं इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकता।
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महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मुख्यमंत्री ने छात्रवृत्ति घोटाले की समग्र रूप में जांच के आदेश दिए हैं। ये आदेश उन्होंने जनता दर्शन और समय-समय पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर किए थे, लेकिन उनके आदेश के बाद भी एसआईटी गठित होने में महीनों लग गए। गृह विभाग ने आईपीएस अफसर टीसी मंजूनाथ की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया और उसे देहरादून और हरिद्वार जनपद में दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना की जांच सौंपी।

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जांच शुरू करने के लिए एसआईटी ने छात्रवृत्ति से संबंधित दस्तावेज तलब करने आरंभ किए तो समाज कल्याण विभाग और जनजाति कल्याण विभाग के कुछ अधिकारियों में बेचैनी व्याप्त हो गई। एसआईटी को जरूरी दस्तावेज देने में भी हीलाहवाली की गई। 

मसला जब शासन स्तर तक पहुंचा तो विगत 20 नवंबर को अपर मुख्य सचिव (समाज कल्याण) डॉ. रणवीर सिंह की अध्यक्षता में गृह, समाज कल्याण, जनजाति कल्याण, आईटी प्रकोष्ठ के अधिकारियों की बैठक हुई। अपर सचिव समाज कल्याण राम विलास यादव ने बैठक का कार्यवृत्त जारी कर संबंधित विभागों को भेज दिया है।

कार्यवृत्त में एसआईटी से यह अनुरोध करने के लिए कहा गया है कि उसकी जांच उन्हीं संस्थानों तक सीमित रहे, जिनके  संबंध में शिकायत हुई है। अपर मुख्य सचिव समाज कल्याण डॉ. रणवीर सिंह से संपर्क  नहीं हो सका लिहाजा इस संबंध में समाज कल्याण विभाग का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। पक्ष मिलने पर प्रकाशित किया जाएगा ।
 

एसआईटी के रडार में सारे संस्थान

समाज कल्याण विभाग के स्तर पर बेशक जांच को एक शिकायत तक सीमित करने की अपेक्षा की जा रही है, लेकिन एसआईटी के रडार में वे सारे शिक्षण संस्थान हैं, जहां छात्रों को दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत धनराशि आवंटित की गई है। बता दें कि एसआईटी इस मामले में एफआईआर तक दर्ज कर चुकी है। 

छात्रवृत्ति घोटाले की सीएम को कई शिकायतें 
छात्रवृत्ति घोटाले की जिस शिकायत के आधार पर समाज कल्याण विभाग एसआईटी जांच को सीमित करने की बात कर रहा है, उसके अलावा भी मुख्यमंत्री को कई शिकायतें की गई हैं। दिग्विजय सिंह नामक व्यक्ति ने तो मुख्यमंत्री से छात्रवृत्ति घोटाले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी। भाजपा नेता रविंद्र जुगरान ने भी मुख्यमंत्री से घोटाले की जांच कराने जाने की संबंध पत्र सौंपा था। इन सभी शिकायतों के आलोक में मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए थे।

हाईकोर्ट ने भी तलब की है रिपोर्ट
छात्रवृत्ति घोटाले में नैनीताल उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार से एसआईटी जांच को लेकर 12 दिसंबर तक रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने ये आदेश बृहस्पतिवार को रविंद्र जुगरान की जनहित याचिका पर दिए थे। जुगरान का कहना था कि छात्रवृत्ति योजना में करोड़ों का घोटाला हुआ है, इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए।

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