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उत्तराखंड: धान खरीद नीति में सरकार ने किया संशोधन, एजेंटों को देनी होगी 10 लाख की एफडीआर

Thu, 18 Oct 2018 09:11 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 18 Oct 2018 09:11 AM IST
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Big Change in uttarakhand paddy purchase policy
धान

न्यूनतम मूल्य समर्थन योजना के तहत धान खरीद नीति 2018-19 में प्रदेश सरकार ने संशोधन किया है। प्रमुख सचिव खाद्य आपूर्ति विभाग आनंद बर्द्धन की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किए गए। अब लाइसेंस प्राप्त कमीशन एजेंट को धान क्रय करने के लिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के पास पंजीकरण करना अनिवार्य होगा। पंजीकरण के समय ही कमीशन एजेंट को राष्ट्रीयकृत बैंक से जारी 10 लाख रुपये एफडीआर संभागीय खाद्य नियंत्रक के नाम जमा करनी होगी। पहले यह राशि पांच लाख रुपये निर्धारित थी। 

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आगामी खरीफ सीजन के लिए सरकार ने 29 सितंबर 2018 को धान खरीद नीति की अधिसूचना जारी की थी। एक अक्तूबर से प्रदेश में इस नीति को लागू किया गया। इसमें सरकार ने संशोधन कर धान क्रय करने के लिए कमीशन एजेंटों के पंजीकरण के लिए पांच लाख रुपये की एफडीआर (फिक्स डिपॉजिट) को बढ़ाकर 10 लाख कर दिया है। मंडी समिति से लाइसेंस प्राप्त कमीशन एजेंट को संभागीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय में पंजीकरण करना अनिवार्य होगा।
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पंजीकरण के बाद ही विभाग द्वारा धान क्रय करने के लिए सब एजेंट के रूप में अधिकृत किया जाएगा। साथ ही केंद्र वार एजेंटों को कोड नंबर दिए जाएंगे। नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि मंडियों में धान की नीलामी के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है तो मंडी परिसर से बाहर भी स्थान चिह्नित करने के लिए मंडी समितियों को अधिकार दिए गए।
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1.50 लाख मीट्रिक टन धान क्रय करने का लक्ष्य
सरकार ने गढ़वाल और कुमाऊं मंडल से एक अक्तूबर 2018 से 28 फरवरी 2019 तक 1.50 लाख मीट्रिक टन धान क्रय करने का लक्ष्य रखा है। जिसमें ‘ए’ ग्रेड धान का 1770 रुपये और सामान्य श्रेणी का 1750 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय किया है। केंद्र सरकार ने धान क्रय के लिए 17 प्रतिशत नमी के मानक निर्धारित किए हैं। नीति में यह प्रावधान है कि यदि किसान धान के नमी तत्व को केंद्र सरकार के मानकों के अनुरूप विक्रय करना चाहता है, तो इसके लिए कमीशन एजेंट के माध्यम से सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए मंडी समिति दरें निर्धारित कर सकती हैं। 

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