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भेल के सीने पर भू-माफिया उड़ा रहे मौज

Wed, 07 Aug 2013 09:58 AM IST
हरिद्वार/नवाज
हरिद्वार/नवाज Updated Wed, 07 Aug 2013 09:58 AM IST
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BHEL is not able to save their land

हरिद्वार में सरकार के उपक्रम भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) को लगाने के लिए तत्कालीन दौर में जमीन तो आंवटित कर दी गई लेकिन आज भेल के आला अधिकारियों की लापरवाही के चलते इसी जमीन पर भू-माफिया मौज ले रहे हैं।

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भू-माफिया के द्वारा भेल की जमीन पर कब्जा कर हर साल नई बस्ती खड़ी कर दी जा रही है, लेकिन भेल के अधिकारी हैं कि इसकी सुध लेने को राजी नहीं।

करोड़ों रुपये देकर अधिग्रहीत की गई भूमि
हरिद्वार में कारखाना स्थापित करने के लिए ली गई आठ गांवों के किसानों की जमीन को भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) सुरक्षित नहीं रख पा रहा है। करोड़ों रुपये देकर अधिग्रहीत की गई भूमि अतिक्रमण की भेंट चढ़ती जा रही है।
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हाल यह है कि अधिग्रहण के 50 साल बाद भी भेल अपनी जमीन की चहारदीवारी नहीं कर पाया है। जिसके चलते भू माफिया मौज काट रहे हैं। भारत सरकार ने शिवालिक पर्वत माला की तलहटी में बसे हरिद्वार तहसील के आठ गांवों की 6770 एकड़ जमीन 1962 में अधिग्रहीत की।
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अपना काम चलता, तो फिर कहां जनता
किसानों की उपजाऊ जमीन पर भेल को स्थापित किया गया। करीब साढ़े तीन हजार एकड़ पर भेल ने अपने प्लांट, आवासीय कालोनी, स्कूल, अस्पताल, शॉपिंग सेंटर आदि बनाए। लेकिन अन्य जमीन की सुध नहीं ले रहा है।

जिसके कारण भगत सिंह चौक, टिबड़ी, कड़च्छ, शिवालिक नगर, अंबेडकरनगर, धीरवाली आदि क्षेत्र की जमीन पर अतिक्रमण कर रिहायशी बस्तियां खड़ी हो चुकी हैं। सूत्रों के मुताबिक करीब 15-20 एकड़ जमीन अभी तक भेल गवां चुका है।

अवैध कब्जों के खिलाफ भेल विस्थापित किसान भी लगातार आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज को अनसुना किया जा रहा है। हाल यह है कि 50 साल में भेल ने अधिग्रहीत जमीन की बाउंड्री तक नहीं करवाई। इससे भूमि लगातार खुर्दबुर्द की जा रही है।

इन गांवों से ली थी जमीन
सरकार ने राजपुर, बांसोवाली, अहमदपुर कड़च्छ, रानीपुर, रावली महदूद, जमालपुर खुर्द, ज्वालापुर, सलेमपुर महदूद गांवों की 6770 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था।

सिडकुल को भी दी जमीन
भेल की 561 एकड़ जमीन पर सिडकुल भी स्थापित किया गया। सरकार ने भेल से जमीन लेकर सिडकुल को दे दी। सिडकुल बांसोवाली में अब भी 120 एकड़ मांग रहा है। इसको लेकर दोनों में विवाद की स्थिति पैदा हो गई थी। इसके अलावा आवास विकास परिषद और सिविल एविएशन को भी जमीन दी गई।


इनकी भी सुनिएः
'भेल किसानों की जमीन को सुरक्षित रखने में असफल रहा है। भेल प्रबंधन की लापरवाही के कारण अतिक्रमण हो रहे हैं। किसानों को मांगों को भी दरकिनार किया जा रहा है।'
-बलवंत सिंह चौहान, अध्यक्ष, किसान संघर्ष समिति।

'अतिक्रमण कहां-कहां है। इसके बारे में संपदा विभाग से जानकारी जुटाई जा रही है। अतिक्रमण के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।'
-राजेंद्र कुमार, सीनियर डीजीएम, जनसंपर्क विभाग।

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