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शुभ मुहूर्त में भाई-दूज मनाने के साथ, सम्पन्न हुए पांच दिवसीय त्योहार

Sat, 21 Oct 2017 07:55 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 21 Oct 2017 07:55 PM IST
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bhaiya dooj celebration in dehradun
bhaiya dooj - फोटो : amar ujala

दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का आखिरी दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को भाई दूज के रूप में मनाया गया।

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भाई-बहन के स्नेह और प्रेम के प्रतीक भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है। शनिवार को शुभ मुहूर्त में बहनों ने तिलक किया तो वहीं भाई भी अपनी बहनों को आकर्षक उपहार देना नहीं भूले। 

धनतेरस के साथ ही शुरू हुए पांच दिवसीय त्योहारों का भाई-दूज के साथ समापन हो गया। इस बार भाई दूज पर विशेष संयोग बना। इस दिन द्वितीया तिथि, स्वाति नक्षत्र, प्रीति योग, बालव करण शनिवार होने के साथ ही तुला राशि पर सूर्य, चंद्रमा, बुध, बृहस्पति का मिलन (चतुर्र्गही) योग शुभप्रद रहा। इस योग की वजह से इस दिन का महत्व बढ़ गया।
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वहीं अधिकतर बहनों ने शुभ समय में भाई का टीका किया। सुबह घर पर पूजा-अर्चना करने के पश्चात भाई को तिलक कर मिठाई खिला गोला दिया गया। वहीं भाई भी बहनों को आकर्षक उपहार देना नहीं भूले। अधिकतर बहनों ने सुबह 10.38 बजे से दोपहर 1.26 बजे तक त्योहार मनाया। हालांकि इससे पहले सुबह 7.50 बजे से 9.15 बजे तक भी बहनों ने भाईयों का तिलक किया। इसके साथ ही कई बहनों ने तो बकायदा भाईयों को गेंदे के फूल की माला भी पहनाई। वहीं इस मौके के लिए बाजार में भी आकर्षक उपहार आए हुए थे। खासकर आकर्षक ज्वेलरी, पर्स एवं चॉकलेट आदि आइटम दिए गए। 
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ये है मान्यता
मान्यता है कि भाई-दूज के दिन सूर्य पुत्र यम ने अपनी बहन यमुना के घर जाकर भोजन कर उपहार भेंट किया था, तभी से यह त्योहर यम द्वितीय एवं भाई दूज के रूप में मनाया जाता है। इस दिन यम की पूजा के पश्चात यमुना की पूजा-अर्चना की जाती है। इस पर्व पर यमुना में स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन जो भाई अपनी बहन का आतिथ्य स्वीकार करते हैं उन्हें यमराज का भय नहीं रहता।  भविष्योत्तर पुराण के अनुसार यमराज ने यमुना को वरदान दिया था कि जो भी व्यक्ति यम द्वितीया के दिन यमुना के जल में स्नान कर बहन के घर जाकर उनके हाथों से बना भोजन करेगा, उसकी आयु लंबी होगी। यदि किसी कारण से भाई यमुना में स्नान नहीं कर पाते हैं तो बहन के घर जाकर उनके हाथों से यमुना जल का टीका लगवाएं। भाई दूज की रात को यमराज के नाम का चौमुखा दीपक जला कर मुख्य दरवाजे पर रखें। ऐसा करने से भाई का जीवन सुखमय होता है। 

ऐसे की पूजा
सबसे पहले बहनों ने चावल के आटे से चौक बनाई। इस चौक पर भाई को बिठाकर भाई की हथेली पर चावल का घोल लगाया। इसके बाद इसमें सिंदूर, पान, सुपारी, मुद्रा आदि हाथों पर रख धीरे-धीरे भाई की लंबी आयु की कामना की। इसके बाद भाई की आरती उतार कलावा बांध मुंह मीठा कराया। 


भाई ने दिया सरप्राइज
तिलक रोड निवासी सीबा बंसल का भाई शशांक बंसल मर्चेंट नेवी में है। ऐसे में सीबा को भाई के आने की कम ही उम्मीद थी। सीबा ने बताया कि भाई से बात भी बहुत कम ही हो पाती है। वहीं हर समय हम लोगों को भाई की चिंता लगी रहती है। भाई-दूज पर उसने विशेष रूप से यमुना के जल का तिलक तैयार किया हुआ था हालांकि शशांक ने भी बहन से भाई दूज पर न आने की बात कह दी थी। इसके बावजूद जब शशांक बहन के पास टीका कराने पहुंच गया तो वह खुशी से उछल पड़ी। सीबा ने भाई को टीका किया तो उसे आकर्षक उपहार भी मिल गया। जीएमएस रोड निवासी साधना अरोड़ा की तीनों बेटियों की शादी के बाद से वह अकेली हैं। कई साल पहले पति की मौत हुई तो भाई ने ही उनकी जिम्मेदारी ले ली हालांकि भाई सहारनपुर रहते हैं और कभी-कबार ही बहन के पास पहुंचते हैं। इस बार भाई ने कुछ व्यस्तता की बात कही तो बहन उदास हो गई हालांकि भाई-दूज पर वह सीधे साधना के घर पहुंच गए तो साधना की खुशी का ठिकाना न रहा। साधना ने बताया कि उन्होंने तुरंत बाजार से मिठाई मंगवाई और भाई का तिलक किया। 

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