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Uttarakhand: सावधान! घरों में आ रहे भालू, वन विभाग ने किया 'अलर्ट', सुबह-शाम जंगल में ना जाएं
Thu, 20 Nov 2025 08:56 PM IST
देहरादून ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 20 Nov 2025 08:56 PM IST
सार
सर्दियों में भालू हाइबर्नेशन में होते हैं। इसके अलावा भोजन की कमी, जलवायु परिवर्तन, कूडे का समुचित प्रबंधन न होने आदि वजहों से उनके व्यवहार में बदलाव भी संभावित है।
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भालू
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
विस्तार
प्रदेश में भालू के ग्रामीणों पर हमले का सिलसिला जारी है। जो अब तक कई ग्रामीणों को घायल कर चुका हैं, इसमें कुछ की मौत हो चुकी है, ऐसे में जबकि भालू ग्रामीणों के घरों तक पहुंच रहे हैं। मानव-भालू संघर्ष की रोकथाम के लिए विभाग का कहना है कि ग्रामीण सुबह शाम जंगल जाने से बचें।
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प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव रंजन कुमार मिश्र ने जारी निर्देश में कहा, पिछले कुछ दिनों से राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों से मानव-भालू संघर्ष की घटनाएं सामने आई है। सर्दियों में भालू हाइबर्नेशन में होते हैं। इसके अलावा भोजन की कमी, जलवायु परिवर्तन, कूडे का समुचित प्रबंधन न होने आदि वजहों से उनके व्यवहार में बदलाव भी संभावित है। मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए लोगों जागरूक किया जाए। ग्रामीण समूह में चलें, किसी भी तरह के कचरे को घर के आस-पास व इधर-उधर न फेंके।
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आबादी क्षेत्रों के आसपास प्रकाश की उचित व्यवस्था करें। घरों के आस-पास झाड़ियों की सफाई करें। वहीं, विभाग के अधिकारी भालू की सक्रियता वाले क्षेत्रों की पहचान करें। यदि कहीं से किसी तरह की घटना की सूचना मिलती है तो घटना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें। क्षेत्र को सुरक्षित करें और भीड़ को दूर रखें। जबकि दीर्घकालिक उपाय के तौर पर भालू को प्राकृतवास में ही आहार उपलब्ध हो इसके लिए वन क्षेत्रों में ओक, काफल, जंगल बेरी आदि पौधे लगाएं।
अधिक भालू घनत्व वाले क्षेत्रों में उसके आवास स्थलों का संरक्षण किया जाए। वन कर्मियों के क्षमता विकास के लिए समय-समय पर फील्ड स्टाफ के नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए। जिसमें भालू के व्यवहार एवं नवीन बचाव तकनीकों के संबंध में जानकारी दी जाए। इसके अलावा क्षेत्र एवं ऋतु आधारित मानव-भालू संघर्ष प्रबंध योजना तैयार की जाए।
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