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प्रदेश अध्यक्ष पद की रेस से कोश्यारी का ‘किनारा’
विजेंद्र श्रीवास्तव / अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Thu, 19 Nov 2015 09:34 AM IST
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उत्तराखंड में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद पर पार्टी के कद्दावर नेताओं की निगाहें लगी हुई हैं। नाम की चर्चा की पतंग चुपचाप उड़ाई जाने की बात कही जा रही है।
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जिससे नाम बने रहने का ‘काम’ आहिस्ता से होता रहे। इस बीच, पार्टी के सबसे कद्दावर नेताओं में एक पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने इस रेस से किनारा कर लिया है। यह बात उन्होंने संकेत की भाषा में नहीं बल्कि खुलकर कही है। अब उनका ‘वरदहस्त’ किस पर होगा और इसके क्या परिणाम होंगे, इसे लेकर सब की निगाहें लगी हुई हैं।
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2017 में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसको लेकर पार्टी तैयारी में जुटी है पर कांग्रेस से दो-दो हाथ करने से पहले भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष पद की कुर्सी में कद्दावर नेता आपसी ‘कस बल’ जांच रहे हैं। कहने को पार्टी में लोकतंत्र की दुहाई दी जा रही है।
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विधिवत चुनाव होने और सर्वमान्य फैसला होने का संदेश दिया जा रहा है, पर पर्दे के पीछे सभी समीकरण और गोटियां सेट की जा रही हैं। इस बार तीन रावत वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत, त्रिवेंद्र सिंह रावत और धन सिंह रावत रण में हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल बलूनी को तो मीडिया ने नाम की घोषणा होने से पहले ही प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है।
पिछली बार तीरथ सिंह रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत के बीच कड़ी टक्कर हुई थी। प्रदेश अध्यक्ष की रेस में पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद भगत सिंह कोश्यारी के शामिल होने की बात कही जा रही थी। पर भगत सिंह कोश्यारी ने अध्यक्ष पद की कुर्सी की रेस में होने की बात को खारिज कर दिया है। फोन पर हुई बातचीत में उनका कहना है कि वह पूर्व में प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं।
इसलिए किसी नए व्यक्ति को मौका दिया जाना चाहिए। यह बात उन्होंने ‘ऊपर’ भी बता दी है। वर्तमान परिस्थिति में उनके अनुसार ही मैदान से हटने से किस को लाभ होगा, किसके समीकरण बनेंगे और बिगड़ेंगे, यह तो वक्त ही बताएगा।
राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी अविनाश राय खन्ना और प्रदेश चुनाव अधिकारी केदार जोशी के निर्देशन में प्रक्रिया चल रही है। इसके परिणाम 15 दिनों में आने का अनुमान लगाया जा रहा है।