27 साल बाद बसंत पंचमी पर ऐसा संयोग बेहद शुभ
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बसंत पंचमी पर 27 साल बाद बेहद शुभ संयोग बन रहा है। वहीं मलमास लगने की वजह से इस बार सभी त्योहार 11 दिन पहले पड़ रहे हैं।
बसंत पंचमी पर सरस्वती और राधा-कृष्ण की पूजा की जाती है। साथ ही छोटे बच्चों की इस दिन से विद्या आरंभ कराई जाती है। माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही बसंत पंचमी के नाम से जाना जाता है।
24 जनवरी को सुबह 5:10 बजे से पंचमी तिथि की शुरुआत होगी, जो कि रात 2.25 मिनट तक रहेगी। इस दिन पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र, परिघ योग, बव करण का जो संयोग बन रहा है। यही संयोग वर्ष 1988 में बना था।
इसे बेहद शुभ माना जा रहा है। इस दिन सरस्वती और राधा-कृष्ण जी का पूजन करने के साथ ही पीले वस्त्र पहने जाते हैं। पीले फल, फूल और मिष्ठान भगवान को चढ़ाए जाते हैं।
हर कार्य के लिए शुभ है यह दिन
बसंत पंचमी का दिन हर कार्य के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन गृह-प्रवेश, शादी-समारोह, मुंडन आदि शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
उत्तराखंड विद्वत सभा के उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी ने बताया कि इस दिन ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल के जल से सरस्वती जी को उत्पन्न किया था। डॉ. आचार्य सुशांत राज ने बताया कि गेहूं की बालियों की पूजा भी की जाती है।
विद्या आरंभ करने के लिए शुभ
सरस्वती पूजन का दिन होने की वजह से बसंत पंचमी विद्या के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन से छोटे बच्चों को लिखना सिखाया जाता है। पहली बार हाथ में पैन पकड़ाकर लिखवाने के साथ ही इस दिन से बच्चों को स्कूल भेजना भी बेहद अच्छा माना जाता है।