उत्तराखंड में बैंकों की हड़ताल से 1500 करोड़ का लेन-देन अटका, गुरुवार को भी बंद रहेंगे बैंक
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प्रदेशभर में महज दो प्रतिशत वेेतन वृद्धि के प्रस्ताव के विरोध में बुधवार को बैंक कर्मचारी हड़ताल पर रहे। पहले ही दिन हड़ताल की वजह से 1500 करोड़ रुपये से ऊपर का लेन-देन अटक गया। अपने-अपने जिलों में बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।
राजधानी में दो हजार से ज्यादा बैंक कर्मचारियों ने जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। बैंक कर्मचारियों ने चेताया है कि अगर वेतन वृद्धि को आए प्रस्ताव में संशोधन न किया गया तो आंदोलन और उग्र हो जाएगा। बृहस्पतिवार को भी सभी बैंकों में हड़ताल रहेगी।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर देशभर में बैंक कर्मचारी व अधिकारी हड़ताल पर चले गए। उत्तराखंड में 1864 बैंक शाखाओं में कोई कामकाज नहीं हुआ। हड़ताल की वजह से पहले ही दिन करीब 1500 करोड़ का लेन-देन अटक गया।
बैंक कर्मचारियों ने प्रदेशभ्रर में जोरदार प्रदर्शन किया। राजधानी में करीब दो हजार बैंक कर्मचारियों व अधिकारियों ने परेड ग्राउंड में एकत्र होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में पहुंचे इंटक के प्रदेश अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट ने कहा कि बैंक कर्मचारियों की वेतन बढ़ोतरी की मांग जायज है।
केंद्र सरकार बड़े पूंजीपतियों को रियायत देकर बैंक कर्मचारियों की मांगें नहीं मान रही है। प्रदर्शन में पहुंचे राज्य कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष ठाकुर प्रहलाद सिंह ने कहा कि वह पूरी तरह से बैंक कर्मचारियों के साथ हैं। परिवहन निगम के महामंत्री रामचंद्र रतूड़ी ने कहा कि बैंक कर्मचारियों के आंदोलन को उनका पूर्ण समर्थन है।
जरूरत पड़ी तो वह भी आंदोलन में कूद पड़ेंगे। बैंकों की इस हड़ताल में ऑल इंउिया बैंक ऑफिसर एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर कॉर्डिनेशन कमेटी, नेशनल कंफेडेरेशन ऑफ बैंक इंप्लाइज, बैंक इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन, नेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स, नेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ बैंक ऑफिसर, इंडियन नेशनल बैंक इंप्लाइज कॉर्डिनेशन कमेटी शामिल है।
बुधवार को बैंक कर्मचारियों ने परेड ग्राउंड से घंटाघर तक जुलूस निकाला। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के संयोजक जगमोहन मेंदीरत्ता ने बताया कि हर पांच साल में वेतन समझौता होता है। यूनियन के प्रतिनिध और बैंकों के प्रतिनिधि(इंडियन बैंकर्स एसोसिएशन) के साथ मिलकर यह समझौता करते हैं। वर्ष 2012 में जो समझौता हुआ था वह 31 अक्तूबर 2017 तक था। एक नवंबर 2017 से यह समझौता लंबित था। पिछली बार वेतन में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई थी। इस बार सरकार ने ऑफर किया है कि केवल दो प्रतिशत ही वेतन बढ़ोतरी करेंगे। सरकार का कहना है कि बैंक घाटे में चल रहे हैं।
आज भी निकालेंगे जुलूस
जबकि बैंक प्रॉफिट में हैं। बैंकों ने 1,58,600 करोड़ रुपये कमाकर दिए हैं लेकिन बैंकों में बड़े पूंजीपतियों का लोन डिफॉल्टर के लिए इसी बजट में से प्रावधान कर दिया गया है, जिस वजह से कई बैंक घाटे में आ गए हैं। उनका कहना है कि कर्मचारियों ने तो जनधन योजना, मुद्रा लोन, अटल पेंशन योजना के अलावा नोटबंदी में मेहनत से काम किया है। खुद पीएम मोदी भी कई मौकों पर यह बात स्वीकार कर चुके हैं लेकिन वेतन वृद्धि के नाम पर सरकार का रवैया गलत है।
बैंक कर्मचारियों का कहना है कि उनकी शाखाएं बढ़ी हैं। काफी कर्मचारी रिटायर हुए हैं। उनकी जगह नई भर्तियां नहीं हुई हैं। 2012 के समझौते के तहत वेतन पर आने वाला खर्च 13.81 प्रतिशत था जो कि आज 10 प्रतिशत रह गया है। यानी साढ़े तीन प्रतिशत वेतन का खर्च कम हो गया है। इसके बावजूद केवल दो प्रतिशत की बढ़ोतरी दी जा रही है। प्रदर्शन में हरिओम रेखी, पीआर कुकरेती, आरपी शर्मा, बीपी सुंद्रियाल, राजन पुंडीर, समदर्शी बड़थ्वाल, कमल तोमर, आरके गैरोला, सीके जोशी, राजन पुृंडीर, कुंदन सिंह, विजय कुमार गुप्ता, शार्दुल ढौंडियाल, इंदर सिंह, सोन सिंह रजवार, ललित बडोनी सहित भारी संख्या में बैंक कर्मचारी शामिल रहे।
आज भी निकालेंगे जुलूस
बैंक कर्मचारी बृहस्पतिवार को भी हड़ताल पर रहेंगे। इसके तहत सुबह परेड ग्राउंड में एकत्र होकर प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद परेड ग्राउंड से घंटाघर तक जुलूस निकालेंगे। बैंकों का कहना है कि सरकार उनकी मांग न मानी तो वह उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।