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खेतों में सोना उगाकर, गरीबी दूर भगाई
रेनु सकलानी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 06 Nov 2014 03:29 PM IST
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देहरादून की बांदल घाटी निवासी उर्मिला देवी ने अपनी मेहनत से गरीबी तो दूर की ही, खेतों से सोना भी उगा रही हैं।
अमर उजाला फाउंडेशन ने किया सहयोग
अमर उजाला फाउंडेशन का साथ मिला तो अपनी आय में और इजाफा कर लिया। कहती हैं कि मुझे सफल बनाने में अमर उजाला फाउंडेशन ने बहुत सहयोग दिया है। मुझे खेती की नई तकनीकी और प्रशिक्षण लेने का मौका मिल रहा है।
उर्मिला कहती हैं कि अगर सही तरीका अपनाया जाय तो किसान बदहाली में नहीं रह सकता। खेती को बेहतर बनाकर उसमें से सोना उगाया जा सकता है।
उर्मिला देवी मधुमक्खी पालन कर साल में दो बार शहद निकाल कर 600 रुपए प्रतिकिलो के भाव से बेचती हैं। बुरांश के जूस, चटनी और अचार बनाना भी शुरू किया है। घरेलू उपयोग के लिए आंगन में सब्जियां उगाती हैं।
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उनकी मेहनत और लगन को देखकर अमर उजाला फाउंडेशन ने उन्हें जूस, स्क्वैश, अचार और मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिया। साथ ही उनके बनाए उत्पादों को बाजार तक पहुंचाकर उचित दाम भी दिलवा रहा है।
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दूसरों के लिए बनीं प्रेरणा पुंज
वर्ष 1989 में उर्मिला जब ब्याह कर घंतुसेरा आईं तो बेरोजगार पति के पास आय का कोई जरिया नहीं था। घर के नाम पर मिट्टी की एक जर्जर कोठरी थी। जीने के लिए चार बीघा (करीब पौन एकड़) जमीन और एक भैंस थी।
एक साल बाद भैंस ने दूध देना बंद कर दिया। उर्मिला ने इस बदहाली से उबरने के लिए पति के साथ गांव में रहकर मौजूदा साधनों से ही मजबूत आर्थिक जरिया बनाने की कोशिश की।
मेहनत और सूझ-बूझ से अरमानों को आसमान तक पहुंचाने की ठानी। आज उनकी गिनती न केवल घाटी के सफल किसानों में होती है बल्कि वे अन्य लोगों को सपने पूरे करने का हौसला भी देती हैं।
उर्मिला का आर्थिक माडल
उर्मिला ने एक और भैंस का इंतजाम कर गांव में दूध बेचना शुरू किया। अब वह दूध डेरियों को बेच रही हैं। रोजमर्रा के खर्चे इससे पूरे करती हैं, लिहाजा बाकी आय बचत बन गई। परंपरागत धान की खेती के बजाय अदरक की फसल उगानी शुरू की।
पहली बार में अदरक ने उन्हें इतना लाभ दिया कि अब तक इसको अपनाए हैं। तीन महीने की अदरक की खेती के बाद बींस तैयार किया। बाद में गेहूं बोए।
सही दाम पाने के लिए फसल को मंडियों में ले जाना शुरू किया। बीस हजार की लागत के बाद अदरक से 80,000 रुपए मिल जाते हैं। बींस से उन्हें करीब 20 से 25 हजार तक का फायदा होता है।
बेटा वायुसेना में
अब उनका आर्थिक आधार काफी मजबूत हो चुका है। उन्होंने गांव में ही पक्का घर बनाया है। तीन बच्चों को शिक्षित किया। उनका बेटा वायुसेना में है जबकि बड़ी बेटी बीए फाइनल और छोटी बीएससी द्वितीय वर्ष में है।