बलूनी की मौत के बाद भी दलालों का बोलबाला
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रेलवे अधिकारी सुनील कुमार बलूनी की खुदकुशी के बाद भी दून स्टेशन पर दलाली का धंधा बंद नहीं हुआ है। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले अवैध माल पार करने का जो काम दिनदहाड़े चलता था, उसे अब रात के वक्त अंजाम दिया जाने लगा है।
दलालों पर शिकंजा कसने का दावा करने वाले रेलवे, वाणिज्य कर, आरपीएफ और जीआरपी भी रात के खेल पर नजर नहीं रखते। ऐसे में दलालों को स्टेशन से माल निकालने की खुली छूट रहती है। अमर उजाला ने मंगलवार देर रात स्टेशन का जायजा लिया तो साफ दिखा कि रात के अंधेरे में स्टेशन से माल आराम से पार हो रह है।
रात 10:30 बजे
पार्सल दफ्तर वाले गेट पर एक लोडर खड़ा था। तीन युवक मजदूरों से सामान लोड करवा रहे था। यहां एक युवक शराब के नशे में मजदूरों पर रौब झाड़ता नजर आया। युवक आपस में बातचीत कर रहे हैं कि इस वक्त सामान बाहर निकालने में कोई झंझट नहीं है। एक-एक कर सभी पार्टियों का सामान निकाल लेंगे।
रात 11:05 बजे
रेस्ट कैंप की तरफ से आकर एक लोडर पार्सल गेट पर रुका। दलालों ने लोडर में लदा सामान स्टेशन के भीतर रखवा दिया, इनमें दवाओं की कुछ पेटियां भी थीं। तीनों युवक टहलते रहे। इसी बीच एक दूसरे लोडर में बिजली के तारों के बंडल और अन्य सामान लोड किया गया। नशे में धुत एक युवक बोला कि एक भी सामान इधर-उधर हुआ तो पूरी कीमत वसूल करूंगा।
रात 11:15 बजे
एक और लोडर पार्सल सेक्शन के गेट पर पहुंचा। तीनों युवकों ने स्टेशन से सफेद बोरों में पैक सामान लोड करवा दिया। इस बीच कैमरे का फ्लैश चमकने पर दो युवक लोडर के पास पहुंचे और उसे तुरंत निकलने की हिदायत दी। लोडर के जाते ही दोनों अमर उजाला टीम के पास आए, परिचय जानने के बाद दोनों फोटो नहीं छापने की गुजारिश करने लगे।
रात 11:30 बजे
पार्सल सेक्शन के बाद अमर उजाला टीम ने स्टेशन के दूसरी ओर सिंघल मंडी से सटे प्लेटफार्म नंबर चार का जायजा लिया। प्लेटफार्म पर काफी सामान पड़ा हुआ था। सामान को ठेलियों में रखने के लिए पांच-छह मजदूर खड़े थे। सबको सिंघल मंडी की ओर से आने वाले लोडरों का इंतजार था। एक मजदूर ने बताया कि दलाल इस रास्ते से अकसर सामान ले जाते हैं।
रात 11:40 बजे
चार नंबर प्लेटफार्म के ही लक्खीबाग चौकी की तरफ वाले अंतिम छोर पर दो युवक दीवार के सहारे खड़े थे। दोनों यहां शराब पी रहे थे। इनके पास ही ठेलियों पर काफी सामान रखा हुआ था। शायद दोनों दीवार के दूसरी ओर माल लेने आने वालों का इंतजार कर रहे थे। इस बीच अमर उजाला टीम नजदीक पहुंची तो दोनों दीवार फांदकर भाग निकले।
मिलीभगत तो नहीं
रात के खेल में यह सवाल भी उठने लगा है कि कहीं रेलवे और वाणिज्य कर के कुछ कर्मियों ने तो दलालों को यह रास्ता नहीं सुझाया है। दरअसल, बलूनी की मौत से रेलवे और वाणिज्य कर विभाग पर दबाव बढ़ गया है। इसके बाद से रेलवे और वाणिज्य कर कर्मी स्टेशन पर खुद को मुस्तैद दिखाते हैं, जबकि दिनभर कोई सामान नहीं उठता। लेकिन रात को पार्सल सेक्शन और चोर दरवाजों पर क्या हो रहा है, यह देखने वाला कोई नहीं।
स्टेशन पर गिरोहबंदी
अमर उजाला टीम मौके पर पहुंची तो साफ हुआ कि स्टेशन पर दलाल गिरोहबंदी के साथ काम करते हैं। लोडर वाला सामान लेने निकलने से पहले फोन पर संपर्क करता है। इसी के साथ दलाल पार्सल सेक्शन के पास पहुंच जाते हैं। पहले से तय होता है कि कौन सा सामान किस लोडर में जाएगा। मजदूरों को भी साथ रखा जाता है। जो लोडर आने वाला हो, उसका सामान छांटकर गेट के पास पहले ही पहुंचा दिया जाता है। गेट पर दलाल या उसका साथी रहता है। इशारा मिलते ही सामान लोड किया जाता है और लोडर निकल जाता है। मजदूरों से लेकर लोडर चालक भी इस गिरोह में शामिल होते हैं।
काले धंधे में पूरी ईमानदारी
दलाल भले ही टैक्स चोरी का माल स्टेशन से निकालने का काला धंधा करते हों, लेकिन इस काम में ईमानदारी बरती जाती है। जिस व्यापारी का माल हो, वह उसके पास ही सुरक्षित पहुंचना सुनिश्चित किया जाता है। हालांकि, ईमानदारी बनाए रखने के लिए दलाल मजदूरों, लोडर चालकों को धमकाने से भी गुरेज नहीं करते।
पार्सल का सामान रिलीज या रिसीव करने का वक्त सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक है। लीज पर आने वाला सामान ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचने के बाद कभी भी उठाया जा सकता है। लेकिन इसकी आड़ में किसी को अवैध तरीके से सामान नहीं ले जाने दिया जाएगा।
-एसडी डोभाल, स्टेशन अधीक्षक।