'पतंजलि उत्पादों के खिलाफ फतवा बेमानी है'
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पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि उत्पादों के खिलाफ दक्षिण भारत में जारी किया गया फतवा बेमानी है। आयुर्वेदिक दवाएं दुनिया के सभी धर्मों से जुड़े लोग प्रयोग करते हैं।
गोमूत्र पतंजलि के पांच उत्पादों में प्रयोग किया जाता है। कहा कि इस तरह का फतवा इस्लाम के भी खिलाफ है।
पतंजलि योगपीठ में पत्रकारों से वार्ता में आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि संस्था की इकाइयों में करीब 700 आयुर्वेदिक औषधियां और हर्बल उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
इनमें से पांच उत्पादों (गौधन अर्क, संजीवनी वटी, पंचगव्य साबुन, कायाकल्प तेल और शुद्ध फिनायल) में गोमूत्र प्रयोग किया जाता है। अर्क और वटी ही औषधियों की श्रेणी में आती हैं। दोनों का प्रयोग कैंसर जैसे असाध्य रोगों के उपचार के लिए किया जाता है।
किसी जाति को ध्यान में रखकर नहीं बनाई जाती दवा
दवाओं और हर्बल पदार्थों का निर्माण किसी जाति को ध्यान में रखकर नहीं किया जाता। ऐसे में जीवन रक्षक औषधियों के खिलाफ फतवा जारी करना आश्चर्यजनक है। यह इस्लाम के भी खिलाफ है। दुनियाभर के करोड़ों मुसलमान बाबा रामदेव द्वारा बताए गए योग और आसन करते हैं। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि स्वदेशी के माध्यम से विदेशी लूट रोकना हमारा मकसद है।
साजिश की बू: काजमी
आचार्य के साथ पत्रकारों से वार्ता के दौरान आल इंडिया इमाम संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुफ्ती शमूम काजमी ने कहा कि इस तरह का फतवे जारी करना इस्लाम के खिलाफ है। दवाओं का कोई धर्म नहीं होता। यह मानव मात्र के लिए जिंदगी लेकर आती है। लाखों मुसलमान प्रतिदिन योग और आयुर्वेद अपना रहे हैं। हो सकता है कि फतवे के पीछे कोई साजिश हो। काजमी ने कहा कि पतंजलि की दवाएं विशुद्ध हैं और प्रत्येक रोग में लाभकारी है।