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अटल आयुष्मान योजना: पहाड़ में किसी काम के नहीं गोल्डन कार्ड, दवा-डॉक्टर बिना सूने वार्ड
Sun, 22 Sep 2019 09:19 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 22 Sep 2019 09:19 AM IST
सार
- निजी अस्पताल की सुविधा नहीं, सरकारी में डॉक्टर नहीं
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प्रतीकात्मक
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विस्तार
पहाड़ों में अटल आयुष्मान योजना के गोल्डन कार्ड किसी काम के नहीं हैं। सरकारी अस्पतालों में कार्ड धारक मरीजों को न तो दवाइयां मिल रही हैं और न ही इलाज कराने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। पहाड़ों में निजी अस्पताल न होने के कारण गोल्डन कार्ड धारक मरीज इलाज कराने के लिए पूरी तरह से सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं। प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में मरीजों को गंभीर बीमारियों में इलाज कराने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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अटल आयुष्मान योजना में पांच लाख का निशुल्क इलाज कराने के लिए प्रदेश और राज्य से बाहर के 167 सरकारी और निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। लेकिन पहाड़ों में निजी अस्पतालों की सुविधा न होने के कारण मरीजों को सरकारी अस्पतालों में भी बेहतर इलाज नहीं मिल रहा है। जबकि गरीबों को निशुल्क इलाज की सुविधा देने के लिए योजना का जो असल मकसद है, वह पहाड़ों में नजर नहीं आ रहा है।
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ग्रामीणों को आयुष्मान कार्ड का नहीं मिल रहा लाभ
चमोली जिले में 137518 लोगों ने आयुष्मान कार्ड बने हैं। निजमूला घाटी के दरवान सिंह अपनी पत्नी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। पत्नी के पेट में दर्द होने से अल्ट्रासाउंड कराना था। लेकिन आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद भी उनका अल्ट्रासाउंड निशुल्क नहीं हो पाया।
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सरकारी अस्पताल में सुविधा नहीं, रेफर हो रहे मरीज
जिला में 244814 लोगों के गोल्डन कार्ड बन चुके हैं। सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं के अभाव और निजी अस्पताल न होने से गोल्डन कार्ड पर मरीजों को इलाज कराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कार्ड पर मरीजों को सरकारी अस्पतालों में ज्यादा लाभ नहीं मिल रहा है। सड़क दुर्घटनाओं में घायल और गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज हायर सेंटर रेफर किए जा रहे हैं। यहां तक कि सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसूता, सामान्य बुखार, सिर दर्द, फ्रेक्चर के भर्ती मरीजों को पूरी दवाइयां तक नहीं मिल पा रही हैं। बुखार से पीड़ित आयुष्मान कार्डधारक खाड़ी निवासी रोशनलाल आर्य जिला चिकित्सालय बौराड़ी में दो दिन से भर्ती हैं। उनका कहना है कि अस्पताल से पूरी दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं, जिससे उन्हें बाहर से मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ रही है।
कनेक्टिविटी की दिक्कत से नहीं बन रहे कार्ड
जनपद के तोषी, त्रियुगीनारायण गांव समेत तल्लानागपुर, रानीगढ़, बच्छणस्यूं पट्टी के कई गांवों में लोगों के गोल्डन कार्ड नहीं बन पाए हैं। सीएससी में कनेक्टिविटी की समस्या के चलते लोगों के कार्ड नहीं बन रहे हैं।
सुस्त रफ्तार से बढ़ा इंतजार
अटल आयुष्मान योजना जिले में रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। योजना के तहत विभाग को जिले में पांच लाख 63 हजार 907 लोगों को लाभ दिया जाना था। लेकिन, अभी तक मात्र दो लाख 14 हजार 637 कार्ड बन पाए हैं। जिले में गोल्डन कार्ड धारकों के लिए मात्र दो निजी अस्पताल ही योजना में पंजीकृत हैं। जिससे मरीजों को कार्ड में बेहतर इलाज नहीं मिल रहा है।
पहाड़ों में जहां-जहां बड़े निजी अस्पताल हैं, उन्हें योजना में सूचीबद्ध किया गया है। लेकिन पहाड़ों में निजी अस्पतालों की संख्या मैदानी क्षेत्रों की तुलना में काफी कम है। गोल्डन कार्ड पर मरीज को सरकारी अस्पतालों में सभी सुविधाएं दी जा रही हैं। गंभीर बीमारी पर इमरजेंसी में मरीज किसी भी सूचीबद्ध निजी अस्पताल में इलाज करवा सकता है।
-डीके कोटिया, अध्यक्ष, राज्य अटल आयुष्मान योजना